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बोकारो से मोरहाबादी पहुंचे कारीगर, सड़क किनारे खुद मिट्टी के दीये और बर्तन बनाकर कर रहे बिक्री

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Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
10:36 am| 31 October 2026| 5 min read|
बोकारो से मोरहाबादी पहुंचे कारीगर, सड़क किनारे खुद मिट्टी के दीये और बर्तन बनाकर कर रहे बिक्री

रांची। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही राजधानी रांची के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। जगह-जगह मिट्टी के दीये, बर्तन और सजावटी सामान की दुकानें सजने लगी हैं। इसी बीच मोरहाबादी मैदान के आसपास एक ऐसे कारीगर भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, जो बोकारो से रांची पहुंचकर सड़क किनारे मिट्टी के सामान तैयार कर रहे हैं और खुद ही उनकी बिक्री भी कर रहे हैं।

दीपावली के अवसर पर रोजगार और बेहतर बिक्री की उम्मीद लेकर बोकारो से आए इस कारीगर ने मोरहाबादी में अपना छोटा सा टेंट लगाया है। इसी टेंट के नीचे वे रहते हैं और दिनभर मेहनत कर मिट्टी के दीये, बर्तन और घरकुंडे तैयार करते हैं। खास बात यह है कि वे केवल सामान बनाते ही नहीं, बल्कि खुद ग्राहकों को अपना सामान बेच भी रहे हैं।

मेहनत से तैयार कर रहे दिवाली का सामान

कारीगर सड़क किनारे बैठकर अपने हाथों से मिट्टी के सामान को आकार दे रहे हैं। दीपावली को देखते हुए दीये और घरकुंडे जैसे पारंपरिक सामान तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी त्योहार के दौरान मांग रहती है। दूर बोकारो से आकर अस्थायी रूप से टेंट में रहना और वहीं सामान बनाकर बेचना उनके संघर्ष और मेहनत को दर्शाता है।

ग्राहकों के इंतजार में कारीगर

दीपावली पर मिट्टी के दीयों और पारंपरिक बर्तनों की खरीदारी का विशेष महत्व है। ऐसे में कारीगरों को उम्मीद है कि त्योहार के नजदीक आने के साथ ग्राहकों की भीड़ बढ़ेगी और उनके तैयार किए गए सामान की अच्छी बिक्री होगी। एक तरफ बड़े बाजारों में रंग-बिरंगी इलेक्ट्रॉनिक लाइटों की चमक है, तो दूसरी तरफ ये कारीगर अपनी मेहनत और पारंपरिक कला के दम पर मिट्टी के दीयों की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

मोरहाबादी में सड़क किनारे बैठा यह कारीगर सिर्फ मिट्टी के सामान नहीं बेच रहा, बल्कि अपनी मेहनत और हुनर के जरिए त्योहार के इस मौसम में रोजी-रोटी कमाने की कोशिश भी कर रहा है।

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