रांची: राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित दिवाली मेला 2026 में इस बार खरीदारी और मनोरंजन के साथ पारंपरिक कला और कारीगरी भी लोगों को आकर्षित कर रही है। मेले में लगाए गए एक विशेष स्टॉल पर लोगों को रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है। यहां आगंतुकों को बताया जा रहा है कि रेशम के कीड़ों से कोया कैसे तैयार होता है और उससे रेशम का धागा निकालकर कपड़ा किस तरह बनाया जाता है।
स्टॉल पर लोगों को रेशम उत्पादन की पारंपरिक तकनीक से परिचित कराया जा रहा है। उन्हें समझाया जा रहा है कि रेशम के कीड़े सबसे पहले कोया बनाते हैं। इसके बाद कोये से रेशम का महीन धागा निकाला जाता है। इस धागे को तैयार करने और बुनाई की प्रक्रिया से गुजरने के बाद सुंदर रेशमी कपड़ा तैयार होता है।
रेशम उत्पादन की बारीकियों से हुए परिचित
मेले में पहुंचने वाले लोग इस प्रक्रिया को लेकर काफी उत्सुक नजर आ रहे हैं। खासकर बच्चों और युवाओं के लिए यह स्टॉल जानकारी हासिल करने का अच्छा माध्यम बन रहा है। लोग रेशम के कोये से लेकर तैयार कपड़े तक के सफर को करीब से समझ रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें इस काम में शामिल कारीगरों की मेहनत, धैर्य और पारंपरिक हुनर के बारे में भी जानकारी मिल रही है।
पारंपरिक कारीगरी को मिल रहा मंच
दिवाली मेले में इस तरह के स्टॉल का उद्देश्य केवल उत्पादों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि पारंपरिक कला और स्थानीय कारीगरों के हुनर को लोगों तक पहुंचाना भी है। आधुनिक दौर में मशीनों और औद्योगिक उत्पादन के बीच पारंपरिक रेशम निर्माण की प्रक्रिया लोगों के लिए विशेष आकर्षण बन रही है।
मोरहाबादी का दिवाली मेला इस तरह खरीदारी और मनोरंजन के साथ लोगों को भारतीय पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और कारीगरों की मेहनत से जोड़ने का अवसर भी प्रदान कर रहा है।

