गुमला: झारखंड के गुमला जिले से मानव तस्करी और नाबालिग के शोषण का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां 15 वर्षीय आदिवासी किशोरी को अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर दूसरे राज्य ले जाया गया। आरोप है कि किशोरी को राजस्थान में 45 वर्षीय एक व्यक्ति के हाथों महज 20 हजार रुपये में बेच दिया गया। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर किशोरी को अपने घर में जबरन शादी के लिए मजबूर किया। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी और उसका यौन शोषण किया जाता था।
किसी तरह आरोपित के चंगुल से निकलकर किशोरी वहां से भागने में सफल रही। करीब एक सप्ताह पहले घर पहुंचने के बाद उसने परिजनों को पूरी घटना बताई। इसके बाद पीड़िता के पिता ने विशुनपुर थाने में लिखित आवेदन देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मामले के सामने आने के बाद इलाके में मानव तस्करी को लेकर चिंता बढ़ गई है।
नौकरी का झांसा देकर दिल्ली ले गई महिला
पीड़िता के पिता के अनुसार, उनकी बेटी को नौकरी दिलाने का झांसा देकर जुलाई महीने में विशुनपुर प्रखंड के बिरीटोली निवासी जतरी उरांव अपने साथ दिल्ली ले गई थी। परिजनों को उम्मीद थी कि बेटी को वहां रोजगार मिल जाएगा और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।
लेकिन आरोप है कि दिल्ली पहुंचने के बाद किशोरी को कथित मानव तस्करी से जुड़ी सुनीता लोहरा के घर पर छोड़ दिया गया। इसके बाद उसे दिल्ली की एक चाल में काम पर लगा दिया गया। किशोरी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसे नौकरी के नाम पर किस तरह की परिस्थितियों में धकेला जा रहा है।
राजस्थान में 20 हजार रुपये में बेचने का आरोप
पीड़िता के पिता की ओर से दिए गए आवेदन के मुताबिक, सितंबर महीने में सुनीता लोहरा किशोरी को दिल्ली से राजस्थान ले गई। वहां कथित तौर पर 45 वर्षीय एक व्यक्ति के हाथों उसे 20 हजार रुपये में बेच दिया गया।
आरोप है कि उक्त व्यक्ति ने किशोरी को अपने घर में जबरन शादी करने के लिए मजबूर किया। किशोरी ने जब इसका विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की जाती थी। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी लगातार उसका यौन शोषण करता था।
इस तरह नौकरी की उम्मीद लेकर घर से निकली नाबालिग किशोरी कथित तौर पर मानव तस्करी और शोषण का शिकार हो गई।
रात में मौका मिलते ही दो हजार रुपये लेकर भागी किशोरी
पीड़िता के अनुसार, आरोपी के घर में रहने के दौरान वह लगातार वहां से निकलने का मौका तलाश रही थी। करीब एक सप्ताह पहले उसे मौका मिला तो वह रात के अंधेरे में घर से निकल गई। बताया गया कि वह अपने साथ दो हजार रुपये लेकर वहां से भागी थी।
इसके बाद उसने बस से दिल्ली तक का सफर किया। दिल्ली पहुंचने के बाद ट्रेन से रांची आई और फिर गुमला पहुंचकर अपने गांव लौट गई। घर पहुंचने के बाद उसने परिजनों को अपने साथ हुई पूरी घटना की जानकारी दी। बेटी की आपबीती सुनकर परिवार के लोग परेशान हो गए और उन्होंने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई।
विशुनपुर थाने में दिया गया आवेदन, पुलिस ने बताई यह बात
मामले को लेकर पीड़िता के पिता ने विशुनपुर थाना में लिखित आवेदन देकर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
सोमवार सुबह करीब 8 बजे विशुनपुर थाना प्रभारी अर्जुन कुमार यादव ने बताया कि पुलिस को इस मामले में आवेदन प्राप्त हुआ है। हालांकि, आवेदन में कुछ त्रुटियां पाई गई हैं। परिजनों को उन त्रुटियों में सुधार कराने के लिए कहा गया है। थाना प्रभारी के अनुसार, आवेदन में सुधार होने के बाद मामला दर्ज कर जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मानव तस्करी और बाल सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
गुमला जिले से सामने आया यह मामला एक बार फिर झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में मानव तस्करी की समस्या को उजागर करता है। रोजगार और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर नाबालिग लड़कियों को दूसरे राज्यों में ले जाने की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक 15 वर्षीय किशोरी को नौकरी के नाम पर दिल्ली और फिर राजस्थान तक कैसे पहुंचाया गया और कथित तौर पर उसे बेचने की घटना को अंजाम दिया गया। अब पीड़िता और उसके परिवार को पुलिस की कार्रवाई का इंतजार है। मामले में आरोपों की जांच और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है।

