पटना: बिहार की राजधानी पटना में पुलिस महकमे से जुड़ा भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र में मादक पदार्थ तस्करी के आरोपियों को कथित तौर पर 11 लाख रुपये लेकर छोड़ने के मामले में पांच दारोगा समेत आठ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है। सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
मादक पदार्थ के साथ पकड़ा गया था युवक
जानकारी के अनुसार, फुलवारीशरीफ थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर पठान टोली निवासी आकिब खान उर्फ मो. साकिब खान को मादक पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया था। इस मामले में फुलवारीशरीफ थाना कांड संख्या 1867/26 दर्ज की गई थी। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इसी कार्रवाई के दौरान पुलिस मकान मालिक मो. आफताब आलम और एक अन्य व्यक्ति मो. एहसान को भी हिरासत में लेकर थाने लाई थी। हालांकि, दोनों के नाम दर्ज प्राथमिकी में शामिल नहीं थे।
11 लाख रुपये लेकर छोड़ने का आरोप
आरोप है कि छापेमारी में शामिल पुलिस पदाधिकारियों और जवानों ने मो. आफताब आलम और मो. एहसान को छोड़ने के बदले करीब 11 लाख रुपये लिए। इसके बाद दोनों को पीआर बांड पर छोड़ दिया गया। आरोप यह भी है कि इस पूरी कार्रवाई की जानकारी पुलिसकर्मियों ने अपने वरीय अधिकारियों को नहीं दी।
बताया जा रहा है कि बाद में कथित तौर पर वसूली गई रकम के बंटवारे को लेकर पुलिसकर्मियों के बीच विवाद हो गया। इसी दौरान पूरे लेन-देन की जानकारी वरीय अधिकारियों तक पहुंच गई, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कराई गई।
एएसपी की जांच रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए फुलवारीशरीफ एएसपी ने जांच की। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर उन्होंने अपनी रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि की और रिपोर्ट पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा को सौंप दी। इसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर निलंबन की कार्रवाई की गई।
इन आठ पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
इस मामले में फुलवारीशरीफ थाने के पांच सब इंस्पेक्टर दिवाकर प्रसाद, नारद मुनी सिंह, रितेश कुमार, पवन कुमार और आकाश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनके अलावा तीन कांस्टेबल साबिर आलम, आनंद राज और शुभग कुमार को भी आरोपी बनाया गया है।
सभी आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में जवाबदेही और कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

