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Crime

नामकुम अंचल के पूर्व सीआई मनोज दीक्षित और क्लर्क दीपक गिरफ्तार, डुंडू जमीन के म्यूटेशन से जुड़ा है मामला

एसीबी ने नामकुम अंचल के तत्कालीन अंचल निरीक्षक (CI) मनोज कुमार दीक्षित और तत्कालीन लिपिक दीपक कुमा गिरफ्तार

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Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
10:08 am| 23 September 2026| 5 min read|
नामकुम अंचल के पूर्व सीआई मनोज दीक्षित और क्लर्क दीपक गिरफ्तार, डुंडू जमीन के म्यूटेशन से जुड़ा है मामला

रांची: नामकुम अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज से जुड़े सरकारी दस्तावेज गायब होने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने नामकुम अंचल के तत्कालीन अंचल निरीक्षक (CI) मनोज कुमार दीक्षित और तत्कालीन लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार किया है। दोनों से मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है।

मामला नामकुम अंचल के डुंडू क्षेत्र की जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) से जुड़े दस्तावेजों के गायब होने और कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद एसीबी ने जांच शुरू की थी। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर दोनों की गिरफ्तारी की गई है। 

हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी

जानकारी के मुताबिक, इस मामले में एसीबी रांची थाना में कांड संख्या 18/2026 दर्ज की गई थी। प्राथमिकी में नामकुम अंचल की तत्कालीन अंचलाधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा, तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित, तत्कालीन लिपिक दीपक कुमार समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।

मामला सामने आने के पीछे शिकायतकर्ता थामस साइमन की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में दायर याचिका भी महत्वपूर्ण रही। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नामकुम अंचल से संबंधित जमीन के म्यूटेशन मामले में रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में टालमटोल की गई और मूल राजस्व दस्तावेज सामने नहीं रखे गए। 

डुंडू की जमीन और म्यूटेशन पर उठे सवाल

पूरे मामले की जड़ डुंडू क्षेत्र की विवादित जमीन के म्यूटेशन से जुड़ी बताई जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित जमीन के रिकॉर्ड और दाखिल-खारिज प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। इसी मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बाद में उपलब्ध नहीं पाए गए।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भी अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल सामने आए। अदालत ने प्रथम दृष्टया सरकारी दस्तावेजों के गायब होने को गंभीर मामला माना और एसीबी को जांच का निर्देश दिया। इसके बाद एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई। 

जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारी

एसीबी के अनुसंधान के दौरान तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित और लिपिक दीपक कुमार के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। इसी आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया गया। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित दस्तावेज किन परिस्थितियों में गायब हुए और म्यूटेशन की प्रक्रिया में किस-किस की भूमिका रही। 

बताया गया है कि दीपक कुमार वर्तमान में रांची के भूमि सुधार उपसमाहर्ता (LRDC) कार्यालय में वरीय सहायक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि मनोज कुमार दीक्षित सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मामले में नामजद अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। 

आगे क्या होगी कार्रवाई?

गिरफ्तार दोनों आरोपियों को एसीबी की विशेष अदालत में पेश किया जाना है। एजेंसी उनसे पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है। वहीं, मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और दस्तावेजों के गायब होने की पूरी कड़ी की जांच जारी है। 

फिलहाल यह मामला जांच के स्तर पर है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। एसीबी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि डुंडू की जमीन से जुड़े म्यूटेशन रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी और दस्तावेजों के गायब होने के पीछे कौन-कौन लोग जिम्मेदार थे।

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