रांची: राजधानी रांची में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस अब केवल वारदात के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अपराध को पहले ही रोकने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी दिशा में रांची पुलिस ने ‘प्रिवेंटिव पुलिसिंग’ को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इसके तहत पुराने और सक्रिय अपराधियों की प्रोफाइलिंग, गैंग मैपिंग, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
वरीय पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पुलिस अधिकारियों और थाना प्रभारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में अपराधियों की पहचान, पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को अपडेट करने और संभावित अपराध की आशंका वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए।
10 से 15 साल के अपराध रिकॉर्ड को किया जाएगा अपडेट
पुलिस अब पिछले 10 से 15 वर्षों में सक्रिय रहे अपराधियों और गिरोहों का डेटाबेस दोबारा तैयार करेगी। ऐसे अपराधी जो फिलहाल सक्रिय नहीं हैं, लेकिन भविष्य में दोबारा आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं, उनकी पहचान कर रिकॉर्ड अपडेट किया जाएगा।
पुलिस का उद्देश्य केवल पुराने रिकॉर्ड को जमा करना नहीं, बल्कि इन अपराधियों की गतिविधियों का समय-समय पर सत्यापन करना भी है। इससे पुलिस को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कोई पुराना अपराधी दोबारा किसी गिरोह या आपराधिक गतिविधि से तो नहीं जुड़ रहा है।
हत्या, रंगदारी और नशा तस्करी से जुड़े अपराधियों पर विशेष नजर
पुलिस की निगरानी सूची में अलग-अलग तरह के गंभीर अपराधों से जुड़े लोगों को शामिल किया जाएगा। इसमें हत्या, रंगदारी, मारपीट, भू-माफिया से जुड़े मामले, नशे के अवैध कारोबार, अवैध शराब, चोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे लोगों का रिकॉर्ड शामिल होगा।
इन अपराधियों की जानकारी संबंधित थानों के बैड कैरेक्टर रजिस्टर से जोड़ी जाएगी। पुलिस इन रिकॉर्ड को समय-समय पर अपडेट करेगी और उपलब्ध सूचना के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों की जांच करेगी।
एसएसपी के निर्देश के अनुसार सक्रिय अपराधियों के साथ-साथ ऐसे युवाओं की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी जिनके बारे में पुलिस को आपराधिक गतिविधियों की आशंका हो। हालांकि सोशल मीडिया की निगरानी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध गतिविधियों और कानून के दायरे में की जाएगी।
गैंग मैपिंग से सामने आएगा अपराधियों का नेटवर्क
रांची पुलिस अपराधियों की प्रोफाइलिंग के साथ गैंग मैपिंग पर भी जोर देगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कौन अपराधी किस गिरोह से जुड़ा है, उसके संपर्क किन लोगों से हैं और किन क्षेत्रों में उसकी गतिविधियां रही हैं।
इस तरह की जानकारी पुलिस को अपराध की संभावित घटनाओं को समझने और संबंधित नेटवर्क पर पहले से नजर रखने में मदद कर सकती है। पुलिस संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी सूचना मिलने पर संबंधित थाना स्तर पर त्वरित कार्रवाई करेगी।
बाइकर्स गैंग और हुड़दंग करने वालों पर भी रहेगी नजर
राजधानी में सड़क पर खतरनाक तरीके से बाइक चलाने, स्टंट करने और सार्वजनिक स्थानों पर हुड़दंग करने वाले युवाओं की गतिविधियां भी पुलिस के रडार पर रहेंगी।
खासकर शिक्षण संस्थानों के आसपास छेड़खानी, दबंगई या अन्य परेशान करने वाली गतिविधियों की शिकायतों को गंभीरता से लेने का निर्देश दिया गया है। पुलिस ऐसे मामलों में सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने की तैयारी में है।
सोशल मीडिया पर भड़काऊ कंटेंट डालने वालों पर भी कार्रवाई
रांची पुलिस की नई रणनीति में सोशल मीडिया भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आपत्तिजनक पोस्ट, भड़काऊ रील और एडिटेड वीडियो के जरिए कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की कोशिश करने वाली गतिविधियों पर नजर रखेगी।
पुलिस का कहना है कि यदि सोशल मीडिया से संबंधित किसी गतिविधि से अपराध या शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका सामने आती है, तो सूचना का सत्यापन कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
606 थानों में लगाए जाएंगे 9,006 हाईटेक CCTV कैमरे
अपराध नियंत्रण के साथ-साथ झारखंड के पुलिस थानों की निगरानी व्यवस्था को भी हाईटेक बनाने की तैयारी है। राज्य के 606 पुलिस थानों में 9,006 ऑडियो-वीडियो और नाइट-विजन क्षमता वाले CCTV कैमरे लगाने की योजना को मंजूरी दी गई है।
इसके लिए राज्य सरकार ने करीब 90 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति दी है। योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
इन कैमरों का उद्देश्य थानों की सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने के साथ पुलिस थानों में होने वाली गतिविधियों में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना भी है। प्रमुख स्थानों पर कैमरे लगाए जाने की योजना है, जिसमें थाना परिसर के प्रवेश-निकास, रिसेप्शन, लॉबी, बरामदे और हवालात के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।
24 जिलों के केंद्रीकृत कंट्रोल रूम से होगी निगरानी
योजना के तहत कैमरों की निगरानी के लिए जिलों में केंद्रीकृत कंट्रोल रूम की व्यवस्था की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार JAP-IT के माध्यम से इस पूरी प्रणाली को लागू किया जाएगा और 24 जिलों के केंद्रीकृत कंट्रोल रूम से लाइव निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।
इस व्यवस्था की नियमित समीक्षा वरिष्ठ पुलिस और संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा की जाएगी। इससे थाना स्तर की गतिविधियों की निगरानी के साथ किसी घटना के बाद रिकॉर्डिंग का उपयोग जांच में भी किया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में CCTV व्यवस्था
पुलिस थानों में CCTV कैमरों की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामले में दिए गए निर्देशों के अनुपालन से भी जुड़ी है। झारखंड सरकार के आधिकारिक दस्तावेज में राज्य के सभी थानों में CCTV कैमरे लगाने की योजना का उल्लेख किया गया है।
अपराध होने के बाद नहीं, पहले रोकने पर जोर
रांची पुलिस की इस नई रणनीति का सबसे बड़ा बदलाव यही है कि पुलिस अब अपराध होने के बाद जांच और गिरफ्तारी के साथ-साथ अपराध की संभावना को पहले पहचानने पर भी जोर दे रही है।
अपराधियों का अपडेटेड डेटाबेस, गैंग मैपिंग, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी, सोशल मीडिया पर कानून के दायरे में नजर और थानों में हाईटेक CCTV व्यवस्था को एक साथ जोड़कर पुलिस राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो पुलिस के पास अपराधियों और उनके नेटवर्क से जुड़ी जानकारी पहले से उपलब्ध रहेगी और किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर संबंधित थाना स्तर पर तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी।

