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JPSC भर्ती जांच में बड़ा विस्तार, 21 परीक्षाओं के रिकॉर्ड खंगाल रही CID; 462 नियुक्तियों पर नजर

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07:25 am| 6 October 2026| 5 min read|
JPSC भर्ती जांच में बड़ा विस्तार, 21 परीक्षाओं के रिकॉर्ड खंगाल रही CID; 462 नियुक्तियों पर नजर

JPSC Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच अब और व्यापक होती जा रही है। जांच एजेंसी CID ने उन परीक्षाओं का दायरा बढ़ा दिया है, जो टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के माध्यम से आयोजित की गई थीं। जानकारी के अनुसार TDPL से जुड़ी JPSC की कुल 21 परीक्षाओं के रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

अब तक जांच का मुख्य फोकस 14वीं JPSC परीक्षा, सहायक वन संरक्षक (ACF) और वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) परीक्षा पर था। अब अन्य परीक्षाओं में चयनित अभ्यर्थियों और नियुक्त अधिकारियों से भी पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

462 नियुक्त अधिकारियों पर भी जांच की नजर

जांच के दायरे में आने वाली कुछ परीक्षाओं के जरिए 462 पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं। इनमें फूड सेफ्टी ऑफिसर, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) और सिविल सेवा परीक्षा 2023 जैसी परीक्षाएं शामिल हैं।

CID इन परीक्षाओं में चयनित और नियुक्त अधिकारियों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजने की तैयारी कर रही है। हालांकि, किसी उम्मीदवार या अधिकारी को केवल जांच के दायरे में होना अपने आप में किसी अनियमितता में शामिल होने का प्रमाण नहीं है।

पेपर लीक से OMR में गड़बड़ी तक आरोपों की जांच

CID की जांच में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं को शामिल किया गया है। इनमें पेपर लीक, OMR शीट में कथित हेराफेरी और अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाने जैसे आरोप शामिल हैं।

जांच एजेंसी ने संबंधित परीक्षाओं के दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर उनकी पड़ताल शुरू कर दी है। परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र, OMR शीट और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

इन 18 परीक्षाओं पर भी बढ़ी नजर

जांच के अगले चरण में JPSC की करीब 18 अन्य परीक्षाओं से जुड़े सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की तैयारी है। इनमें झारखंड सिविल सेवा संयुक्त परीक्षा 2023, सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा 2023 और 2025 की परीक्षाएं शामिल हैं।

इसके अलावा विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति, सहायक निदेशक, सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर और ड्रग इंस्पेक्टर की नियुक्ति से संबंधित परीक्षाओं की भी जांच की जा रही है।

इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में प्राध्यापकों की नियुक्ति से जुड़ी 2025 और 2026 की परीक्षाएं भी जांच के दायरे में बताई जा रही हैं।

कई अन्य भर्ती परीक्षाओं के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे

CID की जांच में सिविल जज जूनियर डिविजन नियुक्ति परीक्षा 2023 और ACF-FRO नियुक्ति परीक्षा 2024 से संबंधित रिकॉर्ड भी शामिल हैं।

इसके अलावा सहायक लोक अभियोजक, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, CDPO, झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) 2024 और छठी सीमित उपसमाहर्ता परीक्षा 2018 के सफल अभ्यर्थियों से जुड़े मामलों की भी जांच की जा रही है।

अब तक 27 आरोपी गिरफ्तार

JPSC भर्ती मामले में CID की कार्रवाई के तहत अब तक 27 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता समेत अन्य लोग शामिल हैं।

अब तक की कार्रवाई मुख्य रूप से तीन परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर केंद्रित रही है। 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित तौर पर अनुचित तरीके से सफलता हासिल करने के आरोप में सुमन सौरभ, दीपक राणा, ओमप्रकाश राणा, उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और रक्षक सिंह को गिरफ्तार किया गया है।

वहीं, ACF और FRO परीक्षा के सफल अभ्यर्थी ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून्न को भी गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी है।

छात्र आंदोलन की फंडिंग को लेकर भी शिकायत

JPSC-JSSC नियुक्ति से जुड़े मामलों की जांच के बीच छात्र आंदोलन की कथित फंडिंग को लेकर एक शिकायत भी CID तक पहुंची है। शिकायत में आंदोलन के लिए कथित तौर पर जुटाई गई रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल की जांच की मांग की गई है।

हालांकि, इस शिकायत की CID की ओर से पुष्टि नहीं की गई है और फिलहाल इस मामले में जांच शुरू होने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

जांच आगे बढ़ने से कई भर्तियां आएंगी रडार पर

TDPL के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं के रिकॉर्ड की जांच बढ़ने के बाद JPSC की कई पुरानी और हाल की भर्ती प्रक्रियाएं जांच एजेंसी की नजर में आ गई हैं। अब CID दस्तावेजों, परीक्षा प्रक्रिया और चयन से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

फिलहाल जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण उन परीक्षाओं में चयनित अभ्यर्थियों और नियुक्त अधिकारियों से पूछताछ माना जा रहा है। जांच के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि किन परीक्षाओं में वास्तव में अनियमितता हुई और उसकी जिम्मेदारी किन लोगों पर तय होती है।

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