GLOBAL AWAAZ मुख्य पृष्ठ पर लौटें
Education

जमुई पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर CMO कर्मचारी पर FIR, मामले ने पकड़ा राजनीतिक तूल

G
Global Awaaz Admin
Chief Editor & Administrator at Global Awaaz.
12:32 pm| 26 September 2026| 5 min read|
जमुई पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर CMO कर्मचारी पर FIR, मामले ने पकड़ा राजनीतिक तूल

पटना: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ हुई कथित बदसलूकी और छेड़छाड़ की घटना के बाद अब पीड़िता की पहचान से जुड़ी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पटना पुलिस ने इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के एक कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि जमुई मामले की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट 'X' पर पोस्ट की गई थी। बाद में पोस्ट को हटा दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमुई की घटना से जुड़ी पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की थी। इसी मुलाकात की एक तस्वीर मुख्यमंत्री के आधिकारिक X हैंडल पर साझा की गई। तस्वीर में मुख्यमंत्री के साथ पीड़िता और उसके परिवार के सदस्य नजर आ रहे थे।

पोस्ट में सरकार की ओर से पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिए जाने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही गई थी। हालांकि, नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होने की आशंका को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। विवाद बढ़ने के बाद तस्वीर को हटा दिया गया।

CMO कर्मचारी के खिलाफ कैसे दर्ज हुआ मामला?

पटना के सचिवालय थाना में इस मामले को लेकर FIR दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद सामने आया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात एक स्टेनोग्राफर ने तस्वीर को X पर अपलोड किया था।

शिकायत में कहा गया है कि तस्वीर के प्रसार से नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार की निजता एवं गरिमा प्रभावित हुई और उसकी पहचान उजागर होने की स्थिति पैदा हुई। पुलिस ने तस्वीर को आगे प्रसारित या साझा करने वाले अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग का उल्लेख किया है।

किन धाराओं में कार्रवाई?

पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), पॉक्सो एक्ट और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। मामले की जांच जारी है।

नाबालिग यौन अपराध पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने को लेकर कानून में विशेष सुरक्षा प्रावधान हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर तस्वीर या ऐसी कोई जानकारी साझा करना गंभीर कानूनी सवाल खड़ा कर सकता है, जिससे पीड़िता की पहचान सामने आने की संभावना हो।

जमुई की मूल घटना क्या थी?

यह पूरा विवाद 19 सितंबर को जमुई में हुई उस घटना के बाद शुरू हुआ, जिसमें एक नाबालिग छात्रा और उसके पुरुष मित्र को कथित तौर पर कुछ लोगों ने रास्ते में रोककर उनके साथ मारपीट और बदसलूकी की थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।

मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। घटना को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी स्वत: संज्ञान लिया था और बिहार पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी।

राजनीतिक विवाद भी तेज

पीड़िता की तस्वीर मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किए जाने के बाद मामला राजनीतिक विवाद में भी बदल गया। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने की स्थिति क्यों बनी।

RJD नेता तेजस्वी यादव ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि नाबालिग की पहचान उजागर करना कानून का उल्लंघन हो सकता है। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से सरकार की कार्रवाई का बचाव किया गया है।

सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती

जमुई की मूल घटना में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ अब पीड़िता की निजता और पहचान की सुरक्षा का मुद्दा भी सरकार के सामने है। CMO कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि तस्वीर किस तरह सोशल मीडिया अकाउंट तक पहुंची और इसे आगे किस-किस स्तर पर साझा किया गया।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।

नोट: नाबालिग पीड़िता की पहचान की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस खबर में उसका नाम, चेहरा या पहचान से जुड़ी निजी जानकारी प्रकाशित नहीं की गई है।

"The convergence of information, technology, and global transparency represents the foundation of responsible journalism."

इस खबर को सोशल मीडिया पर शेयर करें

व्हाट्सएप, एक्स (ट्विटर), फेसबुक या डायरेक्ट लिंक द्वारा साझा करें