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यूपी में सरकारी नौकरी के नियम सख्त, गंभीर अपराधों में शामिल उम्मीदवारों पर हो सकती है कार्रवाई

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Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
10:49 am| 31 October 2026| 5 min read|
यूपी में सरकारी नौकरी के नियम सख्त, गंभीर अपराधों में शामिल उम्मीदवारों पर हो सकती है कार्रवाई

हत्या, दुष्कर्म, आतंकवाद, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों में शामिल अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड की होगी जांच; केवल FIR दर्ज होने से नौकरी की पात्रता खत्म नहीं होगी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा एक अहम बदलाव सामने आया है। अब सरकारी पदों पर नियुक्ति से पहले उम्मीदवारों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी गंभीरता से जांच की जाएगी। हत्या, दुष्कर्म, आतंकवाद, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों में शामिल पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी से वंचित किया जा सकता है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी सेवाओं में नियुक्ति के दौरान उम्मीदवारों के चरित्र और पृष्ठभूमि की जांच को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार की ओर से गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों को विशेष रूप से ध्यान में रखने की बात कही गई है।

किन मामलों में सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य हो सकते हैं उम्मीदवार?

नई गाइडलाइन में गंभीर अपराधों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। इनमें हत्या, डकैती, दुष्कर्म, महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध, अपहरण, मानव तस्करी, आतंकवादी गतिविधियां, भ्रष्टाचार, साइबर अपराध और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक या सॉल्वर गैंग से जुड़े मामले शामिल हैं।

इन मामलों में उम्मीदवार की पात्रता अपराध की प्रकृति और कानूनी प्रक्रिया के स्तर के आधार पर तय की जाएगी। कुछ गंभीर अपराधों में अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद भी उम्मीदवार को अयोग्य माना जा सकता है, जबकि कुछ अन्य मामलों में दोषसिद्धि जरूरी होगी।

सिर्फ FIR दर्ज होने पर नहीं जाएगी नौकरी की पात्रता

सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ केवल FIR दर्ज होने या पुलिस जांच लंबित रहने से उसे स्वतः सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा। प्रत्येक मामले की प्रकृति और कानूनी स्थिति को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा।

जिन उम्मीदवारों को अदालत से बरी किया जा चुका है, जिनके मामले कानूनी रूप से समाप्त हो चुके हैं या जिन्हें संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत राहत मिली है, उन्हें भी निर्धारित नियमों के अनुसार पात्रता का लाभ मिल सकता है।

आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी छिपाने पर भी कार्रवाई

नई व्यवस्था के तहत उम्मीदवारों को आवेदन और चरित्र सत्यापन के दौरान अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों, गिरफ्तारी, मुकदमे और दोषसिद्धि से जुड़ी जानकारी देनी होगी। यदि कोई अभ्यर्थी जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाता है और बाद में इसका खुलासा होता है, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

30 दिनों में पूरी करनी होगी पुलिस वेरिफिकेशन प्रक्रिया

भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी रोकने के लिए पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) को चरित्र सत्यापन रिपोर्ट सामान्यतः 30 दिनों के भीतर देने का निर्देश दिया गया है। कुछ पदों पर सत्यापन पूरा होने से पहले औपबंधिक नियुक्ति पत्र भी जारी किया जा सकता है। हालांकि, संवेदनशील पदों के लिए विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही नियुक्ति की व्यवस्था है।

सरकार की नई गाइडलाइन का उद्देश्य सरकारी सेवाओं में नियुक्ति से पहले उम्मीदवारों के चरित्र और आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच के लिए स्पष्ट नियम तय करना है। इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति में अनावश्यक देरी रोकने का प्रयास किया गया है।

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