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हरतालिका तीज 14 सितंबर को: जानें महत्व, इतिहास, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत के दौरान स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां

हरतालिका तीज

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Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
05:42 am| 12 September 2026| 5 min read|
हरतालिका तीज 14 सितंबर को: जानें महत्व, इतिहास, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत के दौरान स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां

रांची/पटना: हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए इस दिन व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित युवतियां भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं। हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित पर्व है।

इस वर्ष हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7:08 बजे शुरू होगी और 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर 14 सितंबर को व्रत रखा जाएगा।

क्यों मनाई जाती है हरतालिका तीज?

पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। माता पार्वती के पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे, लेकिन पार्वती भगवान शिव को ही अपना पति मान चुकी थीं।

मान्यता है कि पार्वती की सखी उन्हें अपने साथ एक घने वन में ले गईं, जहां उन्होंने भगवान शिव की आराधना और कठोर तपस्या की। माता पार्वती की इसी तपस्या के बाद भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

'हरतालिका' शब्द को लेकर मान्यता है कि 'हरत' का अर्थ हरण करना और 'आलिका' का अर्थ सखी या सहेली है। इसी पौराणिक कथा से इस पर्व का नाम हरतालिका पड़ा।

हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व

हरतालिका तीज को पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य की कामना पूरी होती है।

महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और पति के अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं। अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए इस व्रत को करती हैं।

हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनके पीछे वैज्ञानिक प्रमाण का दावा नहीं किया जाता।

कैसे मनाती हैं महिलाएं हरतालिका तीज?

हरतालिका तीज के दिन महिलाएं सुबह स्नान करके स्वच्छ या नए वस्त्र धारण करती हैं। कई जगहों पर महिलाएं पारंपरिक रूप से साड़ी पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं। हाथों में मेहंदी लगाना, चूड़ी पहनना और पूजा के लिए सजना भी इस पर्व की लोकप्रिय परंपराओं में शामिल है।

इसके बाद महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करती हैं। कई स्थानों पर मिट्टी से शिव-पार्वती और गणेश की प्रतिमाएं बनाकर उनकी पूजा करने की परंपरा है। पूजा के दौरान फूल, बेलपत्र, फल, मिठाई, धूप-दीप और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है।

कई क्षेत्रों में महिलाएं समूह में बैठकर हरतालिका तीज की कथा सुनती हैं और भजन-कीर्तन करती हैं। कुछ स्थानों पर रात में जागरण की भी परंपरा है।

निर्जला व्रत की होती है परंपरा

हरतालिका तीज को कठिन व्रतों में शामिल किया जाता है। परंपरागत रूप से कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं, यानी पूरे व्रत के दौरान भोजन और पानी का सेवन नहीं करतीं। कुछ परिवारों और क्षेत्रों में व्रत के नियम अलग भी हो सकते हैं।

व्रत का पारण परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार किया जाता है। इसलिए किसी एक क्षेत्र की परंपरा को सभी जगह अनिवार्य नियम नहीं माना जाना चाहिए।

व्रत रखने वालों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जरूरी सलाह

निर्जला व्रत शरीर के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासकर लंबे समय तक पानी नहीं पीने से डिहाइड्रेशन, कमजोरी, चक्कर और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के अनुसार:

  • अगर किसी को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

  • गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं, छोटे बच्चों और गंभीर स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक भोजन-पानी से दूर नहीं रहना चाहिए।

  • व्रत से पहले पर्याप्त पानी और संतुलित भोजन लेना मददगार हो सकता है।

  • तेज कमजोरी, चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होना, अत्यधिक प्यास या भ्रम जैसी स्थिति होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और तुरंत परिवार के लोगों को बताएं।

  • व्रत खोलते समय एकदम बहुत अधिक भोजन करने के बजाय धीरे-धीरे सामान्य भोजन लेना बेहतर रहता है।

  • धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।

ध्यान दें: व्रत की धार्मिक परंपरा निभाना व्यक्तिगत आस्था का विषय है। स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।

हरतालिका तीज 2026 का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष हरतालिका तीज का मुख्य प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त लगभग सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक बताया गया है। कुछ पंचांगों में स्थान के अनुसार कुछ मिनट का अंतर दिया गया है।

महत्वपूर्ण तिथि और समय

हरतालिका तीज: 14 सितंबर 2026, सोमवार
तृतीया तिथि प्रारंभ: 13 सितंबर, सुबह 7:08 बजे
तृतीया तिथि समाप्त: 14 सितंबर, सुबह 7:06 बजे
प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: लगभग सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक

शुभ मुहूर्त शहर और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार बदल सकता है। इसलिए पूजा के लिए अपने स्थानीय पंचांग या क्षेत्र के पुरोहित से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

इस बार तीज के साथ गणेश चतुर्थी भी

इस वर्ष 14 सितंबर को हरतालिका तीज के साथ गणेश चतुर्थी भी पड़ रही है। तृतीया तिथि 14 सितंबर की सुबह समाप्त होने के बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी। इस कारण इस दिन देश के कई हिस्सों में दो प्रमुख धार्मिक पर्वों की गतिविधियां देखने को मिलेंगी।

गणेश चतुर्थी के लिए पूजा का समय हरतालिका तीज से अलग होगा। इसलिए दोनों पर्वों की पूजा के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना जरूरी है।

तीज सिर्फ व्रत नहीं, सामाजिक और सांस्कृतिक पर्व भी

हरतालिका तीज केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं के बीच सामाजिक मेलजोल और पारिवारिक परंपराओं को मजबूत करने वाला पर्व भी माना जाता है।

कई जगह महिलाएं एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देती हैं, मेहंदी लगाती हैं, पारंपरिक गीत गाती हैं और पूजा में शामिल होती हैं। नवविवाहित महिलाओं के लिए मायके से कपड़े, श्रृंगार सामग्री और अन्य उपहार भेजने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है।

बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में हरतालिका तीज अलग-अलग स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाई जाती है।

क्या है तीज का संदेश?

हरतालिका तीज की धार्मिक कथा में माता पार्वती की दृढ़ इच्छा, तपस्या और संकल्प को विशेष महत्व दिया गया है। आधुनिक संदर्भ में भी यह पर्व परिवार, रिश्तों, आस्था और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है।

इस पर्व का मुख्य संदेश आस्था और संकल्प से जुड़ा है। साथ ही यह भी जरूरी है कि धार्मिक परंपराओं को निभाते समय व्यक्ति अपने स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता का ध्यान रखे।

एक नजर में

पर्व: हरतालिका तीज
तारीख: 14 सितंबर 2026, सोमवार
तिथि: भाद्रपद शुक्ल तृतीया
आराध्य: भगवान शिव और माता पार्वती
मुख्य उद्देश्य: सुखी दांपत्य, पति के स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना
अविवाहित कन्याएं: अच्छे जीवनसाथी की कामना से व्रत रखती हैं
मुख्य पूजा समय: लगभग सुबह 6:05 से 7:06 बजे तक

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