धनबाद: जिले में शिक्षा विभाग की कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ निरसा विधायक अरूप चटर्जी की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी है। विधायक धनबाद समाहरणालय परिसर में उपायुक्त कार्यालय के समक्ष अनशन पर बैठे हैं। उनके आंदोलन को अब राजनीतिक और छात्र संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है। गुरुवार को टुंडी के झारखंड मुक्ति मोर्चा विधायक मथुरा प्रसाद महतो अनशन स्थल पर पहुंचे और अरूप चटर्जी की मांगों का समर्थन किया। वहीं, आइसा के कार्यकर्ताओं ने भी आंदोलन के समर्थन में समाहरणालय के मुख्य गेट के सामने प्रदर्शन किया।
अरूप चटर्जी ने शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार, शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन में पैसे के लेन-देन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया है। उनका आरोप है कि विभाग में शिक्षकों की पोस्टिंग और तबादले में मनमानी की जा रही है, जबकि ग्रामीण स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।
मथुरा महतो ने उठाया शिक्षकों के लंबे समय से शहरी क्षेत्रों में जमे रहने का मुद्दा
अनशन स्थल पर पहुंचे विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है। गांवों के स्कूलों में बच्चों की संख्या के अनुपात में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जबकि कई शिक्षक वर्षों से शहरी क्षेत्रों में ही पदस्थापित हैं।
उन्होंने मांग की कि धनबाद में पिछले 15 से 20 वर्षों से शहरी क्षेत्रों में जमे शिक्षकों की पदस्थापना और कार्यकाल की जांच होनी चाहिए। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि किन परिस्थितियों में शिक्षक इतने लंबे समय से एक ही क्षेत्र में बने हुए हैं। उनके अनुसार, शिक्षकों की तैनाती में संतुलन जरूरी है, ताकि ग्रामीण इलाकों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा मिल सके।
आइसा कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय के मुख्य गेट पर किया प्रदर्शन
अरूप चटर्जी के अनशन को समर्थन देने पहुंचे आइसा के कार्यकर्ताओं ने भी समाहरणालय के मुख्य गेट के सामने प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता लाने और कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों के स्थानांतरण-पदस्थापन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने पर जोर दिया गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों का सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है।
ट्रांसफर-पोस्टिंग में कथित लेन-देन की जांच की मांग
निरसा विधायक अरूप चटर्जी का आरोप है कि शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन में पैसे का लेन-देन किया जाता है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
विधायक का कहना है कि एक तरफ ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ कई शिक्षक लंबे समय से शहरी क्षेत्रों में पदस्थापित हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की जांच जरूरी है।
तीसरे दिन भी जारी अनशन, आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन
तीसरे दिन भी अरूप चटर्जी की भूख हड़ताल जारी रहने के साथ आंदोलन को राजनीतिक और छात्र संगठनों का समर्थन मिलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और शिक्षकों के स्थानांतरण-पदस्थापन का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इन आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं और आंदोलन समाप्त कराने के लिए कोई ठोस पहल होती है या नहीं।

