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सुदिव्य कुमार सोनू का निधन: झारखंड ने खोया जुझारू नेता, हेमंत सोरेन बोले- सोनू भैया का जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति

झारखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री और गिरिडीह सदर से विधायक सुदिव्य कुमार सोनू

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Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
04:48 am| 6 September 2026| 5 min read|
सुदिव्य कुमार सोनू का निधन: झारखंड ने खोया जुझारू नेता, हेमंत सोरेन बोले- सोनू भैया का जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति

रांची/गिरिडीह: झारखंड की राजनीति के लिए रविवार की सुबह बेहद दुखद खबर लेकर आई। झारखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री और गिरिडीह सदर से विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का 6 सितंबर 2026 को हृदयाघात के बाद निधन हो गया। देर रात तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें गिरिडीह के मर्सी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही गिरिडीह से लेकर पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई। अस्पताल और उनके आवास पर समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का पहुंचना शुरू हो गया।

झारखंड आंदोलन के दौर से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

सुदिव्य कुमार सोनू की पहचान सिर्फ एक विधायक और मंत्री के तौर पर नहीं थी, बल्कि वे लंबे समय से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) से जुड़े सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने 1989 में झामुमो के प्राथमिक सदस्य के रूप में अपने सार्वजनिक राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। करीब तीन दशक से अधिक लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने संगठन के भीतर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और धीरे-धीरे पार्टी के प्रमुख नेताओं में अपनी जगह बनाई।

झारखंड आंदोलन के दौर में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने शोक संदेश में कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू आंदोलन के समय से ही दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ मजबूती से खड़े रहे और उन्होंने अपना जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित कर दिया।

2019 में पहली बार बने विधायक

सुदिव्य कुमार सोनू ने वर्ष 2019 में पहली बार गिरिडीह विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर जीत दर्ज की। 2024 में दोबारा विधायक चुने जाने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कैबिनेट में शामिल किया गया।

सरकार में उन्हें कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। वे उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, युवा कार्य, पर्यटन, कला-संस्कृति तथा नगर विकास एवं आवास जैसे महत्वपूर्ण विभागों से जुड़े रहे। अपने कार्यकाल में वे सरकार और संगठन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में भी सक्रिय रहे।

संगठन में भी थी मजबूत पकड़

सुदिव्य कुमार सोनू को झामुमो के भीतर संगठनात्मक और राजनीतिक रणनीति समझने वाले नेताओं में गिना जाता था। पार्टी के सोशल मीडिया और संगठन को मजबूत करने में भी उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है। छात्र आंदोलनों और राजनीतिक मुद्दों पर संवाद स्थापित करने में भी वे सक्रिय रहे।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती थी। दोनों के बीच लंबे राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंध रहे। यही वजह है कि उनके निधन की खबर ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी गहरे सदमे में डाल दिया।

हेमंत सोरेन ने कहा- 'सोनू भैया का जाना मेरे जीवन में ऐसी रिक्तता छोड़ गया...'

सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें देर रात अपने बड़े भाई और प्रिय सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की दुखद खबर मिली। उन्होंने कहा कि इस खबर को स्वीकार कर पाना उनके लिए बेहद कठिन है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक सुदिव्य कुमार सोनू उनके लिए केवल वरिष्ठ साथी या राजनीतिक सहयोगी नहीं थे, बल्कि बड़े भाई की तरह थे, जो स्नेह देते थे, मार्गदर्शन करते थे और हर कठिन समय में मजबूती से उनके साथ खड़े रहते थे। हेमंत सोरेन ने कहा कि सोनू भैया के साथ बिताए पल और उनसे मिली सीख हमेशा उनके साथ रहेंगी।

हेमंत सोरेन ने यह भी कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू ने झारखंड आंदोलन के दौर से ही दिशोम गुरु के साथ पूरी निष्ठा से काम किया और झामुमो के समर्पित सिपाही के रूप में अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू का जाना उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है और उनकी कमी हमेशा महसूस होगी। उन्होंने दिवंगत नेता के संघर्ष, स्नेह और झारखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को जीवनभर याद रखने की बात कही।

अचानक निधन से राजनीतिक जगत में शोक

सुदिव्य कुमार सोनू के अचानक निधन से झारखंड की राजनीति में शोक की लहर है। गिरिडीह में उनके समर्थकों और शुभचिंतकों की भारी भीड़ जुट गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है। झामुमो के लिए उनका निधन खास तौर पर बड़ी क्षति माना जा रहा है, क्योंकि वे लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े हुए थे और सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे।

सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर भले ही अचानक थम गया, लेकिन झारखंड आंदोलन, झामुमो संगठन और राज्य की राजनीति में उनके योगदान की याद लंबे समय तक बनी रहेगी।

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