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Jharkhand SIR की समयसीमा बढ़ेगी? 11.79 लाख दावे लंबित, 63 लाख से ज्यादा मामलों का सत्यापन बाकी

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06:48 am| 6 October 2026| 5 min read|
Jharkhand SIR की समयसीमा बढ़ेगी? 11.79 लाख दावे लंबित, 63 लाख से ज्यादा मामलों का सत्यापन बाकी

Jharkhand SIR: आठ दिन में पूरा नहीं होगा मतदाता सूची पुनरीक्षण, 11.79 लाख दावे लंबित; आयोग से मांगा गया अतिरिक्त समय

Jharkhand SIR: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया तय समयसीमा में पूरी करना चुनौती बन गई है। दावा-आपत्ति की अवधि खत्म होने के बाद बड़ी संख्या में आवेदन सामने आए हैं। वहीं, बड़ी संख्या में नोटिसों का निपटारा और दस्तावेजों का सत्यापन भी अभी बाकी है। ऐसे में राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने भारत निर्वाचन आयोग से SIR की समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है।

मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार दावों और आपत्तियों का निपटारा 14 अक्टूबर तक किया जाना है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 19 अक्टूबर को प्रकाशित होनी है। हालांकि, लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए निर्धारित समय में पूरी प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल माना जा रहा है।

11.79 लाख से अधिक दावे-आपत्तियां प्राप्त

झारखंड में SIR के तहत दावा-आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तारीख 30 सितंबर थी। इस अवधि तक फॉर्म-6, फॉर्म-6ए, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के कुल 11,79,761 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

अंतिम तारीख के आसपास भी बड़ी संख्या में आवेदन जमा किए गए। अकेले 30 सितंबर को 59,666 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें 34,820 फॉर्म-6 और 24,106 फॉर्म-8 शामिल थे।

इन आवेदनों की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई पूरी करने में समय लग रहा है। यही वजह है कि मौजूदा समयसीमा में पूरी प्रक्रिया पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

63 लाख से ज्यादा नोटिसों का निपटारा भी बाकी

SIR के दौरान झारखंड में बड़ी संख्या में मतदाताओं को अलग-अलग कारणों से नोटिस जारी किए गए थे। इनमें नो-मैपिंग, DSE और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी से जुड़े मामले शामिल हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब 63.24 लाख मामलों का निपटारा अभी बाकी है। इनमें लगभग:

  • 14.03 लाख नो-मैपिंग के मामले

  • 3.65 लाख DSE से जुड़े मामले

  • 45.55 लाख लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के मामले

शामिल हैं।

इन मामलों में मतदाताओं से संबंधित दस्तावेज जुटाने, उनका सत्यापन करने और फिर दावों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद ही अंतिम मतदाता सूची तैयार की जा सकेगी।

30 नवंबर तक बढ़ सकती है प्रक्रिया

राज्य निर्वाचन कार्यालय की ओर से SIR की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव के तहत नोटिसों के निपटारे के साथ-साथ दावों और आपत्तियों की सुनवाई की प्रक्रिया को 30 नवंबर तक जारी रखने की संभावना है।

हालांकि, समयसीमा बढ़ाने पर अंतिम फैसला भारत निर्वाचन आयोग को करना है। आयोग से मंजूरी मिलने के बाद ही झारखंड में SIR के संशोधित कार्यक्रम को लागू किया जा सकेगा।

दूसरे राज्यों में भी बढ़ाई गई है समयसीमा

SIR की प्रक्रिया के दौरान जरूरत के अनुसार समयसीमा बढ़ाने का उदाहरण अन्य राज्यों में भी सामने आया है। दिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग ने दावा-आपत्ति की अवधि को 30 अक्टूबर तक और नोटिसों तथा दावों-आपत्तियों के निपटारे की अवधि को 30 नवंबर तक बढ़ाया है।

इसी वजह से झारखंड में भी अब आयोग के फैसले पर नजर है। राज्य निर्वाचन कार्यालय ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अतिरिक्त समय की मांग की है।

अंतिम दिन भी हजारों आवेदन पहुंचे

30 सितंबर को दावा-आपत्ति की अंतिम तारीख होने के बावजूद बड़ी संख्या में आवेदन जमा हुए। इनमें सबसे ज्यादा आवेदन फॉर्म-6 और फॉर्म-8 के रहे।

इसके बाद भौतिक रूप से प्राप्त आवेदनों को डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज करने यानी डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया भी जारी रही। 3 अक्टूबर तक 7,27,252 फॉर्म-6, 13,696 फॉर्म-7, 4,80,016 फॉर्म-8 और 113 फॉर्म-6ए डिजिटाइज किए जा चुके थे।

इस तरह डिजिटाइजेशन के स्तर पर कुल 12,29,268 आवेदन दर्ज किए जा चुके थे।

अब आयोग के फैसले पर टिकी नजर

झारखंड में SIR की प्रक्रिया अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। एक तरफ लाखों नोटिसों का निपटारा बाकी है, वहीं दूसरी ओर प्राप्त दावों और आपत्तियों की जांच भी करनी है। ऐसे में 19 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की मौजूदा समयसीमा पर संशय बना हुआ है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत निर्वाचन आयोग झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अनुरोध पर क्या निर्णय लेता है और SIR की प्रक्रिया के लिए राज्य को कितना अतिरिक्त समय मिलता है।

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