नई दिल्ली: देश के दो प्रमुख बैंकों HDFC बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से जुड़ी डेटा सुरक्षा की खबरों ने बैंकिंग क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है। HDFC बैंक के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर गोपनीय व्यावसायिक जानकारी लीक करने का आरोप लगा है, जबकि SBI के करीब 4,000 ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। दोनों मामलों में जांच जारी है।
HDFC बैंक के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप
HDFC बैंक अपने दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कथित तौर पर गोपनीय बिजनेस रणनीतियों और महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने के मामले की आंतरिक जांच कर रहा है। दोनों अधिकारी बैंक के महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभालते हैं। बैंक यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि कथित तौर पर साझा की गई जानकारी का किसी ने गलत इस्तेमाल तो नहीं किया।
बैंक के प्रवक्ता ने जांच की पुष्टि करते हुए कहा है कि सभी संबंधित तथ्यों का मूल्यांकन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
27 अक्टूबर को अनुप बागची संभालेंगे कमान
यह मामला HDFC बैंक में नेतृत्व परिवर्तन के बीच सामने आया है। अनुप बागची 27 अक्टूबर 2026 को बैंक के नए प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) का पद संभालने वाले हैं। मौजूदा CEO शशिधर जगदीशन का कार्यकाल 26 अक्टूबर को समाप्त होने वाला है।
बैंक में पहले भी शीर्ष प्रबंधन से जुड़े घटनाक्रम चर्चा में रहे हैं। पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के पद छोड़ने की खबरों के बीच नई जांच ने बैंक के आंतरिक प्रशासन और गोपनीयता संबंधी प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया है।
SBI के 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में मिली निजी जानकारी
दूसरी ओर, देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 21 अक्टूबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में डार्क वेब पर ग्राहकों के डेटा के संभावित रूप से उजागर होने की पुष्टि की। बैंक के शुरुआती विश्लेषण में करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड की समीक्षा की गई, जिनमें से 3,897 रिकॉर्ड में व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी (Personally Identifiable Information या PII) पाई गई।
लीक हुए रिकॉर्ड में ग्राहकों के नाम, पंजीकृत मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, ईमेल आईडी, आवासीय पते, शाखा संबंधी जानकारी, ग्राहक सूचना फाइल (CIF) नंबर, लीड आईडी और लोन से जुड़े रिकॉर्ड का मेटाडेटा शामिल होने की बात कही गई है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सभी रिकॉर्ड प्रमाणिक हैं या डेटा किस स्रोत से लीक हुआ। इसकी पुष्टि के लिए विस्तृत जांच की जा रही है।
SBI ने शुरू की साइबर सुरक्षा जांच
SBI के अनुसार, 16 अक्टूबर को उसे अपने थ्रेट इंटेलिजेंस सेवा प्रदाता, डिफेंस साइबर एजेंसी और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) से संभावित डेटा एक्सपोजर को लेकर अलर्ट मिला था। इसके बाद बैंक ने साइबर घटना से निपटने की प्रक्रिया सक्रिय की और स्वतंत्र जांच के लिए CERT-In से संबद्ध साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया।
बैंक ने कहा है कि इस घटना का उसके मुख्य कारोबारी संचालन, वित्तीय प्रदर्शन या कामकाज की निरंतरता पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा है। डेटा की प्रामाणिकता, लीक के स्रोत और संभावित जोखिमों का आकलन अभी जारी है।
ग्राहकों को क्यों सतर्क रहने की जरूरत?
व्यक्तिगत जानकारी के गलत हाथों में पहुंचने से फर्जी कॉल, पहचान की नकल, फिशिंग संदेश और वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, डेटा सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि हर प्रभावित ग्राहक के बैंक खाते से पैसा चोरी हुआ है।
ग्राहकों को अनजान लिंक पर क्लिक करने, OTP या PIN साझा करने और बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाले लोगों पर भरोसा करने से बचना चाहिए। किसी संदिग्ध लेनदेन या धोखाधड़ी की आशंका होने पर तुरंत संबंधित बैंक से संपर्क करना चाहिए।
फिलहाल, HDFC बैंक में कथित गोपनीय जानकारी साझा करने और SBI के ग्राहकों के डेटा के डार्क वेब पर मिलने, दोनों मामलों की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही इन घटनाओं की पूरी प्रकृति, जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

