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धनबाद के प्रगति नर्सिंग होम में 22 वर्षीय महिला की मौत, मेयर की पहल पर परिजनों को 7 लाख रुपये की सहायता

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Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
07:51 am| 27 October 2026| 5 min read|
धनबाद के प्रगति नर्सिंग होम में 22 वर्षीय महिला की मौत, मेयर की पहल पर परिजनों को 7 लाख रुपये की सहायता

धनबाद: धनबाद के सरायढेला स्थित प्रगति नर्सिंग होम में इलाज के दौरान 22 वर्षीय महिला मोनी परवीन की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। घटना की जानकारी मिलने पर धनबाद के मेयर संजीव सिंह अस्पताल पहुंचे और मृतका के परिजनों तथा अस्पताल प्रबंधन के बीच बातचीत कराई। देर रात तक चली वार्ता के बाद परिजनों को 7 लाख रुपये की सहायता राशि देने पर सहमति बनी। इसके बाद परिवार शव लेकर रवाना हुआ।


इलाज के दौरान महिला की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

जानकारी के अनुसार, लोयाबाद निवासी मोनी परवीन की प्रगति नर्सिंग होम में इलाज के दौरान मौत हो गई। 22 वर्षीय महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए। उन्होंने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में विरोध जताया और मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।

परिजनों के आरोपों के बीच अस्पताल परिसर में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। परिवार के सदस्यों ने महिला की मौत के कारणों को लेकर सवाल उठाए और मामले में उचित कार्रवाई की मांग की।

मेयर संजीव सिंह पहुंचे अस्पताल, प्रबंधन से हुई बातचीत

मामले की जानकारी मिलने के बाद धनबाद के मेयर संजीव सिंह प्रगति नर्सिंग होम पहुंचे। उन्होंने मृतका के परिजनों से बातचीत कर उनकी बात सुनी और अस्पताल प्रबंधन के साथ वार्ता की। इस दौरान विवाद को सुलझाने और परिजनों को सहायता दिलाने पर चर्चा हुई।

देर रात तक चली बातचीत के बाद मृतका के परिवार को 7 लाख रुपये की सहायता राशि देने पर सहमति बनी। इसके बाद परिजन शव लेकर रवाना हो गए। इस पहल से तत्काल विवाद समाप्त हुआ, लेकिन इलाज के दौरान हुई मौत से जुड़े सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा।

क्या इलाज में हुई थी लापरवाही?

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मोनी परवीन की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या इलाज के दौरान किसी तरह की लापरवाही बरती गई थी। फिलहाल, परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मौत के वास्तविक कारण और इलाज में किसी संभावित चूक का पता लगाने के लिए संबंधित चिकित्सकीय रिकॉर्ड तथा अन्य तथ्यों की जांच जरूरी होगी।

अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक पक्ष सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

7 लाख रुपये की सहायता पर बनी सहमति

मेयर की पहल पर हुई वार्ता में परिजनों को 7 लाख रुपये की सहायता राशि देने पर सहमति बनी। हालांकि, आर्थिक सहायता पर सहमति बनना और इलाज में लापरवाही की पुष्टि होना दो अलग-अलग बातें हैं। मामले में जवाबदेही तय करने के लिए मौत के कारणों और परिजनों के आरोपों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होगी।

धनबाद में हुई इस घटना ने निजी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और शिकायतों के निपटारे से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मामले में आगे क्या जांच होती है और मौत के वास्तविक कारणों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।

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