GLOBAL AWAAZ मुख्य पृष्ठ पर लौटें
India›राष्ट्रीय समाचार

गुमला के कोबजा गांव में ग्रामसभा का बड़ा फैसला, ईसाई पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर रोक का लगाया बैनर

N
Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
10:08 am| 2 November 2026| 5 min read|
गुमला के कोबजा गांव में ग्रामसभा का बड़ा फैसला, ईसाई पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर रोक का लगाया बैनर

गुमला: झारखंड के गुमला जिले में धर्मांतरण और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। रायडीह प्रखंड के कोबजा गांव में ग्रामीणों ने ग्रामसभा आयोजित कर सामूहिक रूप से एक निर्णय लिया। इसके बाद गांव में ईसाई धर्म के पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर रोक लगाने संबंधी स्थायी बैनर लगाया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला और पुरुष शामिल हुए।

जानकारी के अनुसार, कोबजा गांव में आयोजित ग्रामसभा में आदिवासी समुदाय के लोगों ने अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक पहचान को लेकर चिंता जाहिर की। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से आरोप लगाया कि क्षेत्र में कुछ लोग धर्मांतरण की गतिविधियों के माध्यम से आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाजों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामसभा में चर्चा के बाद पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया।

ग्रामसभा के फैसले के बाद लगाया गया स्थायी बैनर

ग्रामसभा में लिए गए निर्णय के बाद गांव में स्थायी बैनर-पोस्टर लगाया गया। इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिला और पुरुष मौजूद रहे। आदिवासी समुदाय के कई लोगों के साथ निशा उरांव भी विशेष रूप से कार्यक्रम में शामिल हुईं।

ग्रामीणों का कहना था कि आदिवासी समाज की अपनी अलग धार्मिक मान्यताएं, सामाजिक व्यवस्था, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक परंपराएं हैं। इन परंपराओं को सुरक्षित रखना समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मांतरण की गतिविधियों के कारण आदिवासी समाज की पारंपरिक पहचान प्रभावित हो रही है।

आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण की उठाई मांग

कार्यक्रम में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी प्रकृति आधारित परंपराओं, सामाजिक रीति-रिवाजों और पारंपरिक आस्था से जुड़ी हुई है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में धर्मांतरण के प्रयासों से इन परंपराओं को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान को बनाए रखना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से ग्रामसभा में सामूहिक निर्णय लेकर गांव में बैनर लगाया गया है।

फैसले को लेकर प्रशासनिक रुख पर नजर

कोबजा गांव में ग्रामसभा के इस फैसले के बाद इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर ग्रामीण इसे अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण से जुड़ा कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर किसी धार्मिक समुदाय के लोगों के प्रवेश पर सामूहिक रोक लगाने जैसे फैसले को लेकर कानूनी और संवैधानिक पहलू भी महत्वपूर्ण हैं।

भारत के संविधान के तहत प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता और समानता का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में ग्रामसभा के इस निर्णय की वैधानिक स्थिति और प्रशासन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आने की जानकारी नहीं है।

"The convergence of information, technology, and global transparency represents the foundation of responsible journalism."