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JPSC-JSSC कथित धांधली के खिलाफ BJP का राज्यव्यापी आंदोलन शुरू, CBI जांच की मांग; छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग

भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

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Global Awaaz Admin
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10:47 am| 8 September 2026| 5 min read|
JPSC-JSSC कथित धांधली के खिलाफ BJP का राज्यव्यापी आंदोलन शुरू, CBI जांच की मांग; छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CBI जांच, प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने और स्थानीय युवाओं के रोजगार के अधिकार की रक्षा की मांग को लेकर बीजेपी ने मंगलवार से राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत की।

आंदोलन के तहत रांची में महानगर बीजेपी की ओर से धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान नेताओं ने हेमंत सरकार पर जमकर निशाना साधा और JPSC-JSSC की परीक्षाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

आदित्य साहू ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

रांची में आयोजित धरना-प्रदर्शन में पहुंचे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने राज्य सरकार पर प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के कारण राज्य के स्थानीय युवाओं के हित प्रभावित हो रहे हैं।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षाएं आयोजित कर दूसरे राज्यों के छात्रों को नौकरी देने का रास्ता खोल रही है, जबकि झारखंड के स्थानीय युवाओं के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।

बीजेपी का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है, क्योंकि इन परीक्षाओं से हजारों युवाओं का भविष्य जुड़ा हुआ है। पार्टी ने कथित धांधली की निष्पक्ष जांच के लिए मामले को CBI को सौंपने की मांग की है।

प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमों का मुद्दा भी उठा

बीजेपी ने प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर आंदोलन करने वाले छात्रों पर दर्ज मुकदमों को भी बड़ा मुद्दा बनाया है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि जब छात्र परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और अपने अधिकारों को लेकर सड़क पर उतरे, तो उनकी आवाज सुनने के बजाय उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए।

बीजेपी ने सरकार से मांग की है कि आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाए।

पार्टी नेताओं का कहना है कि छात्रों की शिकायतों का समाधान बातचीत और निष्पक्ष जांच के जरिए होना चाहिए, न कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करके।

सीपी सिंह ने CID जांच पर उठाए सवाल

रांची विधायक और बीजेपी नेता सीपी सिंह ने भी JPSC-JSSC मामले की CBI जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले की पहले CID जांच हो चुकी है, लेकिन बीजेपी उस जांच के नतीजों से संतुष्ट नहीं है।

सीपी सिंह ने CID की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि CID राज्य सरकार की एजेंसी है। ऐसे में उनके मुताबिक इस मामले की जांच ऐसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए, जिस पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव होने की आशंका न रहे।

बीजेपी का तर्क है कि CBI जांच होने से मामले की जांच का दायरा व्यापक हो सकता है और कथित अनियमितताओं से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष तरीके से पड़ताल की जा सकती है।

दीपक प्रकाश ने भी आंदोलन को लेकर रखी बात

बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने भी पार्टी के आंदोलन के दौरान छात्रों से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। बीजेपी नेताओं ने कहा कि JPSC और JSSC की परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना राज्य के युवाओं के भविष्य के लिए जरूरी है।

पार्टी का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत सामने आने पर उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

रांची तक सीमित नहीं रहेगा बीजेपी का आंदोलन

बीजेपी ने स्पष्ट किया है कि JPSC-JSSC के मुद्दे पर शुरू किया गया आंदोलन सिर्फ राजधानी रांची तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी राज्य के अलग-अलग जिलों में धरना-प्रदर्शन और अन्य आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित करेगी।

बीजेपी की प्रमुख मांगें हैं:

  • JPSC-JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली की CBI जांच कराई जाए।

  • प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं

  • प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।

  • झारखंड के स्थानीय युवाओं के रोजगार के अधिकारों की रक्षा की जाए।

  • कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई की जाए।

बीजेपी ने संकेत दिया है कि अगर सरकार की ओर से इन मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। अब देखना होगा कि बीजेपी के राज्यव्यापी आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन सरकार की ओर से इस मामले में क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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