भारत में वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने E100 फ्यूल पर चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को मोटर वाहन
नियमों में शामिल करने का कदम उठाया है। E100 ऐसा ईंधन है जिसमें लगभग पूरी तरह एथेनॉल का इस्तेमाल होता है। इस पहल का उद्देश्य पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करना, कच्चे तेल के आयात का बोझ घटाना और देश में वैकल्पिक ईंधन के विकल्पों को प्रोत्साहित करना है।
क्या है E100 फ्यूल?
E100 मुख्य रूप से एथेनॉल आधारित ईंधन है। एथेनॉल का उत्पादन गन्ने, मक्का और अन्य जैविक स्रोतों से किया जा सकता है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की तरह E100 में एथेनॉल की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसलिए इसे इस्तेमाल करने के लिए वाहन के इंजन और ईंधन प्रणाली का उपयुक्त तकनीक से तैयार होना जरूरी है।
मोटर वाहन नियमों में क्या बदला?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 23 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना के जरिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन किया। इसे 26 अक्टूबर को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। संशोधन के तहत उत्सर्जन मानकों और परीक्षण संबंधी प्रावधानों में E100 को E85 के साथ शामिल किया गया है।
क्या आपकी मौजूदा पेट्रोल कार में चलेगा E100?
इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि अब सभी पेट्रोल गाड़ियों में E100 इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह ईंधन केवल उन फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए है, जिन्हें निर्माता ने खास तौर पर इस ईंधन के इस्तेमाल के लिए डिजाइन और प्रमाणित किया है।
सामान्य पेट्रोल कारों और केवल E20 पेट्रोल के अनुकूल गाड़ियों में E100 का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी के फ्यूल-कम्पैटिबिलिटी स्टिकर और कंपनी की ओर से दी गई गाइडलाइन देखनी चाहिए।
कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने की उम्मीद
भारत अपनी ईंधन जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने से पेट्रोल की खपत और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे एथेनॉल उत्पादन और कृषि आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
हालांकि, E100 के व्यापक इस्तेमाल के लिए उपयुक्त वाहनों, ईंधन की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था का विकास भी जरूरी होगा। पर्यावरणीय लाभ इस बात पर निर्भर करेंगे कि एथेनॉल का उत्पादन किस स्रोत से और किस प्रक्रिया से किया जाता है।

