रामगढ़: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी दिवंगत माता स्वर्गीय रूपी सोरेन के दशकर्म के अवसर पर भावुक नजर आए। रामगढ़ जिले के नेमरा स्थित उनके पैतृक आवास पर धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दशकर्म की रस्में संपन्न की गईं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ सभी परंपराओं का पालन किया और अपनी मां को श्रद्धापूर्वक नमन कर उन्हें याद किया।
दशकर्म के अवसर पर नेमरा स्थित पैतृक आवास का माहौल भावुक रहा। मां को खोने का दुख मुख्यमंत्री के लिए एक निजी और संवेदनशील क्षण रहा। इस दौरान उन्होंने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और अपनी माता के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई रस्में
दशकर्म के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार भोजन परोसने की रस्म निभाई। भारतीय परंपरा में किसी प्रियजन के निधन के बाद किए जाने वाले धार्मिक संस्कारों का विशेष महत्व होता है। ये संस्कार दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने और परिवार की परंपराओं का निर्वहन करने का माध्यम माने जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने भी अपनी माता के दशकर्म के अवसर पर इन परंपराओं का पालन करते हुए उन्हें नमन किया। इस दौरान परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए।
नेमरा से जुड़ा है मुख्यमंत्री का पारिवारिक रिश्ता
रामगढ़ जिले का नेमरा गांव मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पैतृक गांव है। इस गांव से उनका गहरा पारिवारिक और भावनात्मक जुड़ाव रहा है। अपनी माता के दशकर्म के अवसर पर पैतृक आवास में पारंपरिक संस्कारों में शामिल होना उनके लिए बेहद निजी क्षण रहा।
मां का स्थान हर व्यक्ति के जीवन में बेहद खास होता है। ऐसे में उनके निधन के बाद होने वाले संस्कार परिवार के लिए भावनात्मक रूप से कठिन होते हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस अवसर पर अपनी मां के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करते हुए पारिवारिक परंपराओं का निर्वहन किया।
दशकर्म की रस्मों के माध्यम से मुख्यमंत्री ने अपनी दिवंगत माता को श्रद्धांजलि अर्पित की। नेमरा स्थित पैतृक आवास पर संपन्न हुए इन धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान परिवार की परंपराओं और मां के प्रति सम्मान का भाव प्रमुख रूप से दिखाई दिया।

