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मां की अस्थियों के विसर्जन के दौरान भावुक हुए हेमंत सोरेन, नम आंखों से दी अंतिम विदाई

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Anurag Iwin Roberts
Editor & Correspondent at Global Awaaz
11:30 am| 19 October 2026| 5 min read|
मां की अस्थियों के विसर्जन के दौरान भावुक हुए हेमंत सोरेन, नम आंखों से दी अंतिम विदाई


रजरप्पा, रामगढ़: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को रामगढ़ जिले के रजरप्पा स्थित दामोदर और भैरवी नदी के संगम पर अपनी दिवंगत मां रूपी सोरेन की अस्थियों का विसर्जन किया। इस दौरान संताल परंपरा और रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। मां को अंतिम विदाई देने के इस भावुक अवसर पर मुख्यमंत्री की आंखें नम हो गईं। अस्थि विसर्जन के दौरान माहौल भावुक रहा।

संताल रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ अनुष्ठान

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रजरप्पा के दामोदर-भैरवी नदी संगम पर अपनी मां की अस्थियों का पारंपरिक विधि-विधान के साथ विसर्जन किया। संताल समाज में पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार से जुड़ी प्रक्रियाओं का विशेष महत्व है। इसी परंपरा के अनुरूप अस्थि विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की गई।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी दिवंगत मां को श्रद्धांजलि अर्पित की। मां को अंतिम विदाई देने का यह क्षण उनके लिए भावनात्मक रहा। अस्थि विसर्जन जैसे संस्कार परिवार के लिए दिवंगत सदस्य को अंतिम विदाई देने और उनकी स्मृतियों को संजोने का महत्वपूर्ण अवसर होते हैं।

मां की स्मृति में भावुक हुए मुख्यमंत्री

मां और संतान का रिश्ता जीवन के सबसे गहरे भावनात्मक संबंधों में से एक माना जाता है। ऐसे में मां के निधन के बाद उनसे जुड़े अंतिम संस्कारों का अवसर स्वाभाविक रूप से भावुक कर देने वाला होता है। रजरप्पा में अस्थि विसर्जन के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की नम आंखें भी इसी भावनात्मक क्षण को बयां कर रही थीं।

मुख्यमंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अनुष्ठान पूरा कर अपनी मां को अंतिम विदाई दी। इस दौरान धार्मिक परंपराओं और पारिवारिक भावनाओं का संगम देखने को मिला।

अस्थि विसर्जन के बाद ग्रामीणों के बीच वस्त्र वितरण

धार्मिक विधि-विधान पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्थानीय ग्रामीणों के बीच वस्त्रों का वितरण भी किया। इस प्रकार अस्थि विसर्जन के साथ ही ग्रामीणों के बीच वस्त्र वितरण का कार्यक्रम भी संपन्न हुआ।

रजरप्पा क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से झारखंड में विशेष पहचान रखता है। दामोदर और भैरवी नदियों का संगम इस क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक अवसरों पर पहुंचते हैं और अपनी आस्था के अनुसार अनुष्ठान करते हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा रजरप्पा

रामगढ़ जिले में स्थित रजरप्पा अपनी धार्मिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर के कारण भी इस क्षेत्र का विशेष महत्व है। दामोदर-भैरवी नदी संगम को स्थानीय स्तर पर धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा जाता है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा अपनी मां की अस्थियों का यहां विसर्जन किया जाना पारिवारिक संस्कारों और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जुड़ा अवसर रहा। संताल परंपरा के अनुसार संपन्न हुए इस अनुष्ठान के बाद उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों के बीच वस्त्र वितरित किए और अपनी मां को अंतिम विदाई दी।


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