धनबाद: झारखंड के धनबाद स्थित बारामुड़ी खटाल में अतिक्रमण हटाने को लेकर जारी विवाद के बीच बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव बुधवार को प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे। यहां उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके हालात का जायजा लिया। इस दौरान पप्पू यादव ने गरीब परिवारों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया। उन्होंने पांच घरों से बनी रोटी और सब्जी खाई तथा परिवारों के साथ काफी समय बिताया। स्थानीय लोगों की परेशानियां सुनने के बाद वह भावुक नजर आए।
गरीब परिवारों के साथ जमीन पर बैठकर किया भोजन
बारामुड़ी खटाल पहुंचने पर सांसद पप्पू यादव ने प्रभावित परिवारों के बीच जाकर उनसे बातचीत की। इस दौरान उन्होंने किसी विशेष व्यवस्था के बजाय आम लोगों की तरह जमीन पर बैठकर भोजन किया। पांच घरों की रोटी और सब्जी खाकर उन्होंने स्थानीय परिवारों के साथ एकजुटता दिखाई।
बताया जा रहा है कि बारामुड़ी खटाल में जमीन खाली कराने और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर कई परिवारों के सामने आवास का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने सांसद को अपनी परेशानियों और भविष्य की चिंता से अवगत कराया। परिवारों की स्थिति और उनकी समस्याएं सुनकर पप्पू यादव भावुक हो गए।
CM हेमंत सोरेन से की मानवीय आधार पर हस्तक्षेप की अपील
प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों का आशियाना उजड़ने से बचाया जाना चाहिए। सरकार को इस पूरे मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रभावित लोगों के हितों का ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि जिन परिवारों के सामने रहने का संकट पैदा हो रहा है, उनके लिए वैकल्पिक आवास और गुजर-बसर की उचित व्यवस्था की जाए। उनका कहना था कि किसी भी कार्रवाई के दौरान गरीब और जरूरतमंद परिवारों के पुनर्वास तथा उनके भविष्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
जमीन विवाद के बीच प्रभावित परिवारों को राहत की उम्मीद
बारामुड़ी खटाल में अतिक्रमण हटाने को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय परिवारों की चिंता है कि कार्रवाई होने की स्थिति में उनके रहने और रोजमर्रा की जिंदगी पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में सांसद पप्पू यादव के दौरे से प्रभावित परिवारों को अपनी बात सरकार तक पहुंचने की उम्मीद जगी है।
पप्पू यादव ने सरकार से अपील की कि विकास और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ गरीबों के मानवीय अधिकारों का भी ध्यान रखा जाए। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।

