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दूसरों के घर रोशन करने निकलीं पिंकी, खुद संघर्ष की धूप में बैठकर बेच रहीं दिवाली की झालर

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Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
11:16 am| 5 November 2026| 5 min read|
दूसरों के घर रोशन करने निकलीं पिंकी, खुद संघर्ष की धूप में बैठकर बेच रहीं दिवाली की झालर

रांची: दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही शहर की गलियां और बाजार रंग-बिरंगी रोशनी से सजने लगे हैं। कहीं आकर्षक लाइटों की चमक है तो कहीं दीयों और सजावटी सामानों की दुकानें लोगों को अपनी ओर खींच रही हैं। लेकिन इसी चमक-दमक के बीच कुछ ऐसी कहानियां भी हैं, जो त्योहार के असली मायने समझाती हैं। ऐसी ही एक कहानी राजस्थान से रांची पहुंचीं पिंकी की है, जो अपने परिवार का सहारा बनने के लिए अरगोड़ा चौक पर दिवाली की झालर बेच रही हैं।

पिंकी के लिए दिवाली सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि परिवार की जरूरतों को पूरा करने और रोजी-रोटी कमाने का एक अवसर भी है। वह सड़क किनारे बैठकर रंग-बिरंगी झालर और सजावटी लाइटें बेचती हैं, ताकि लोग अपने घरों को रोशन कर सकें। उनके साथ उनका छोटा बच्चा भी रहता है। एक ओर वह ग्राहकों को झालर दिखाती हैं, तो दूसरी ओर अपने बच्चे की देखभाल भी करती हैं।

दूसरों के घरों में रोशनी, खुद की जिंदगी में संघर्ष

दिवाली पर लोग अपने घरों को सजाने और रोशन करने के लिए बाजारों से तरह-तरह की लाइटें खरीदते हैं। इन लाइटों को बेचने वाले छोटे दुकानदारों के लिए यही कुछ दिन पूरे परिवार की कमाई का बड़ा सहारा बनते हैं। पिंकी भी इसी उम्मीद के साथ राजस्थान से रांची आई हैं।

अरगोड़ा चौक पर धूप और सड़क किनारे की मुश्किल परिस्थितियों के बीच बैठकर वह झालर बेच रही हैं। त्योहार के दौरान बाजार में बढ़ती भीड़ और ग्राहकों की आवाजाही के बीच उनकी कोशिश है कि अधिक से अधिक सामान बिक सके और परिवार की जरूरतें पूरी हो सकें।

छोटे बच्चे के साथ संभाल रहीं काम और परिवार की जिम्मेदारी

पिंकी की कहानी का एक भावुक पहलू यह भी है कि वह अपने छोटे बच्चे को साथ लेकर काम कर रही हैं। त्योहार की रौनक के बीच उनके लिए काम और बच्चे की देखभाल दोनों जिम्मेदारियां एक साथ निभाना आसान नहीं है। इसके बावजूद वह मेहनत से पीछे नहीं हट रही हैं।

उनकी यह तस्वीर उन हजारों मेहनतकश महिलाओं की जिंदगी की झलक दिखाती है, जो परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने के लिए घर से दूर जाकर भी मेहनत करती हैं। इनके लिए त्योहार की खुशियां बाजार की सजावट से नहीं, बल्कि दिनभर की मेहनत के बाद होने वाली कमाई से जुड़ी होती हैं।

इस दिवाली छोटे दुकानदारों से खरीदारी करने की अपील

पिंकी जैसी महिलाएं और छोटे दुकानदार त्योहारों के दौरान अपनी उम्मीदों के साथ सड़क किनारे दुकान लगाते हैं। बड़े शोरूम और ऑनलाइन बाजारों के बीच इनकी छोटी दुकानों से होने वाली खरीदारी उनके परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

इस दिवाली जब आप अपने घर के लिए झालर, दीये और सजावट का सामान खरीदने बाजार जाएं, तो ऐसे छोटे दुकानदारों से खरीदारी करने पर भी विचार करें। आपकी एक छोटी-सी खरीदारी किसी परिवार की दिवाली को खुशहाल बना सकती है।

दिवाली पर अपने घर को रोशन करने के साथ उन हाथों की मेहनत को भी सम्मान दें, जो दूसरों के घरों में रोशनी पहुंचाते हैं।


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