रांची: राजधानी रांची में नदियों और डैम के आसपास तेजी से हो रहे अनियंत्रित निर्माण पर रोक लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। झारखंड सरकार इसके लिए फ्लड प्लेन जोनिंग एक्ट-2026 लाने की योजना बना रही है। प्रस्तावित कानून लागू होने पर नदी और डैम के कैचमेंट एरिया में निर्माण कार्यों को लेकर सख्त नियम लागू हो सकते हैं। इसका सीधा असर इन क्षेत्रों में पहले से बने हजारों मकानों और भविष्य में होने वाले निर्माण पर पड़ने की संभावना है।
प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण को नियंत्रित करना और जल निकायों के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र को सुरक्षित रखना है। इसके तहत नदियों और डैम के आसपास के इलाकों का सर्वे कर उन्हें बाढ़ के खतरे के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव है।
तीन जोन में बांटे जाएंगे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र
फ्लड प्लेन जोनिंग एक्ट-2026 के प्रस्ताव के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को तीन अलग-अलग जोन में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक जोन में निर्माण और विकास कार्यों के लिए अलग-अलग नियम निर्धारित होंगे। जिन इलाकों में बाढ़ का खतरा अधिक है, वहां निर्माण गतिविधियों पर कड़ी पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। वहीं, कम जोखिम वाले क्षेत्रों में निर्धारित शर्तों के साथ निर्माण की अनुमति देने का प्रावधान हो सकता है।
हजारों मकानों पर पड़ सकता है असर
रांची में कई नदियों और डैम के आसपास आवासीय निर्माण और बस्तियां विकसित हो चुकी हैं। प्रस्तावित कानून के तहत इन क्षेत्रों की पहचान और जोनिंग होने के बाद हजारों मकान नियमन के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, पहले से बने मकानों को लेकर क्या नियम होंगे और उनके मालिकों पर इसका किस तरह प्रभाव पड़ेगा, यह कानून के अंतिम स्वरूप और संबंधित प्रावधानों से स्पष्ट होगा।
ड्राफ्ट पर आम लोगों से मांगे गए सुझाव
सरकार फिलहाल प्रस्तावित कानून के ड्राफ्ट पर आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांग रही है। इस प्रक्रिया के जरिए प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों की राय ली जाएगी। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद कानून को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
जल निकायों और शहर की सुरक्षा पर जोर
रांची में नदी और डैम के आसपास बढ़ते निर्माण से जल निकासी, प्राकृतिक जल प्रवाह और बाढ़ के खतरे को लेकर चिंताएं सामने आती रही हैं। ऐसे में फ्लड प्लेन जोनिंग एक्ट के जरिए जल निकायों के आसपास निर्माण को नियंत्रित करने और भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, इस कानून के लागू होने से पहले यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मौजूदा मकानों, आवासीय बस्तियों और जमीन मालिकों के हितों को लेकर क्या प्रावधान किए जाते हैं। फिलहाल लोगों की नजरें कानून के अंतिम प्रारूप और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

