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रांची में NCST की दो दिवसीय सुनवाई, 70 मामलों पर हुई कार्रवाई; जमीन कब्जे से लेकर PhD वायवा तक के मामले उठे

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Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
11:21 am| 29 October 2026| 5 min read|
रांची में NCST की दो दिवसीय सुनवाई, 70 मामलों पर हुई कार्रवाई; जमीन कब्जे से लेकर PhD वायवा तक के मामले उठे

रांची: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की ओर से रांची के सर्कुलर रोड स्थित परिसदन में दो दिवसीय सुनवाई आयोजित की गई। इस दौरान विवादित जमीन, जिला प्रशासन, विश्वविद्यालय, शिक्षा, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग और सीसीएल से संबंधित कुल 70 मामलों की सुनवाई की गई। आयोग ने विभिन्न मामलों की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की। सुनवाई के दौरान जमीन पर अवैध कब्जे, रैयती जमीन पर सड़क निर्माण और विश्वविद्यालय में पीएचडी के वायवा में देरी जैसे मामले प्रमुखता से सामने आए।

रांची जिले के 30 से 32 मामलों की हुई सुनवाई

एनसीएसटी की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने बताया कि सुनवाई के दौरान रांची जिले से संबंधित लगभग 30 से 32 मामलों पर विचार किया गया। इनमें जमीन विवाद, शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय से जुड़े मामले शामिल थे। आयोग ने संबंधित पक्षों की समस्याओं को सुनते हुए उनके समाधान के लिए हस्तक्षेप किया।

आयोग के हस्तक्षेप के बाद महिलाओं को मिली जमीन

सुनवाई के दौरान रांची जिले में जमीन पर कब्जे से जुड़े मामले भी सामने आए। जानकारी के अनुसार, निर्मला नामक महिला की जमीन पर कब्जा कर लिया गया था। इस मामले में आयोग के हस्तक्षेप के बाद संबंधित जमीन का दखल-दिहानी कराया गया।

इसी तरह सुनीता सांगा की जमीन के मामले में भी आयोग के हस्तक्षेप के बाद दखल-दिहानी की कार्रवाई हुई। इन मामलों में आयोग की पहल से संबंधित महिलाओं को उनकी जमीन पर अधिकार दिलाने की दिशा में कदम उठाया गया।

रैयती जमीन पर सड़क निर्माण का काम रुकवाया

रांची नगर निगम क्षेत्र में रैयती जमीन पर सड़क निर्माण कराए जाने का मामला भी आयोग के सामने आया। शिकायत के अनुसार, संबंधित जमीन पर सड़क बनाई जा रही थी। मामले में आयोग के हस्तक्षेप के बाद सड़क निर्माण कार्य पर रोक लगाई गई और संबंधित रैयत को जमीन वापस दिलाई गई।

इसके साथ ही निर्माण स्थल पर मौजूद सड़क निर्माण सामग्री को भी हटा लिया गया। इस मामले में आयोग की कार्रवाई को जमीन मालिक के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पीएचडी की छात्रा का वायवा घोषित

सुनवाई के दौरान रांची विश्वविद्यालय से जुड़ा एक मामला भी सामने आया। शकुंतला उरांव विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही थीं, लेकिन लंबे समय से उनका वायवा नहीं हो पा रहा था। इस कारण उनकी शोध प्रक्रिया आगे बढ़ने में परेशानी हो रही थी।

मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के हस्तक्षेप के बाद विश्वविद्यालय की ओर से उनका वायवा घोषित कर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अगले एक-दो दिनों में इससे संबंधित आगे की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद जताई गई।

आदिवासियों से जुड़े मामलों के समाधान पर जोर

दो दिवसीय सुनवाई के दौरान आयोग ने जमीन, शिक्षा और अन्य विभागों से संबंधित मामलों पर विचार किया। डॉ. आशा लकड़ा के अनुसार, रांची जिले के कई मामलों में हस्तक्षेप के बाद संबंधित लोगों को राहत मिली है।

आयोग की सुनवाई का उद्देश्य अनुसूचित जनजाति समुदाय से जुड़े लोगों की शिकायतों पर विचार करना और उनके अधिकारों से संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करना है। अब अन्य लंबित मामलों में संबंधित विभागों की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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