मुंबई: वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। घरेलू बाजार गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में दबाव में नजर आया। सेंसेक्स और निफ्टी 50 की शुरुआत करीब सपाट रही, लेकिन कुछ ही देर बाद दोनों प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ नीचे चले गए।
निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया मौद्रिक नीति के असर पर है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।
सेंसेक्स में 900 अंकों से ज्यादा की गिरावट
दोपहर करीब 1 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 909.45 अंक यानी 1.25 फीसदी टूटकर 71,729.26 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
वहीं निफ्टी 50 करीब 323.10 अंक यानी 1.43 फीसदी गिरकर 22,279.95 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 22,254.30 के स्तर तक भी गिरावट दर्ज की।
इस तेज गिरावट से निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी है और बाजार में बिकवाली का दबाव स्पष्ट नजर आया।
मेटल और ऑयल-गैस शेयरों पर ज्यादा दबाव
सेक्टोरल इंडेक्स में भी व्यापक कमजोरी देखने को मिली। दोपहर तक निफ्टी के कई प्रमुख सेक्टर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
निफ्टी मेटल: 3.23% नीचे
निफ्टी ऑयल एंड गैस: 2.60% नीचे
निफ्टी रियल्टी: 2.39% नीचे
निफ्टी हेल्थकेयर: 2.21% नीचे
निफ्टी फार्मा: 2.13% नीचे
निफ्टी एफएमसीजी: 1.81% नीचे
निफ्टी ऑटो: 1.78% नीचे
निफ्टी मीडिया: 1.71% नीचे
सुबह के कारोबार में मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और केमिकल्स जैसे कुछ क्षेत्रों में सीमित मजबूती जरूर दिखाई दी थी, लेकिन बाद में बाजार पर बिकवाली हावी हो गई।
आरबीआई के फैसले से भी बाजार पर दबाव
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, आरबीआई की मौद्रिक नीति में सख्त रुख और रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी ने इक्विटी वैल्यूएशन को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर कंपनियों की फंडिंग लागत और भविष्य की कमाई की उम्मीदों पर पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर, ऊंची ब्याज दरों के माहौल में फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकते हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी बड़ी चिंता
भारतीय बाजार के लिए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की लगातार बिकवाली भी चुनौती बनी हुई है। बाजार जानकारों के अनुसार, ऊंचे वैल्यूएशन और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली से खासकर बड़े शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5.3 फीसदी से ऊपर बने रहने को भी वैश्विक इक्विटी बाजारों के लिए नकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर आरबीआई की नीतिगत दिशा, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर रहेगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा माहौल में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ब्याज दरों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होने वाले कुछ सेक्टर निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं, जबकि ऊंचे वैल्यूएशन वाले शेयरों में दबाव जारी रहने की संभावना है।

