रांची/जमशेदपुर। जमशेदपुर के बिंदल मॉल स्थित उडुपी रेस्टोरेंट में दिनदहाड़े हुई गोलीबारी की घटना को लेकर झारखंड में सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घटना को लेकर राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस नेतृत्व में योग्यता और मेरिट के बजाय राजनीतिक प्रभाव और कथित सेटिंग को प्राथमिकता मिलने का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि जमशेदपुर में दिनदहाड़े हुई गोलीबारी और चार लोगों के घायल होने की घटना ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने स्तर से स्थिति की जानकारी ली और लोगों से बातचीत में जो बातें सामने आईं, वे चिंताजनक हैं।
‘आम आदमी आखिर कहां सुरक्षित है?’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पहले जिस तरह की आपराधिक घटनाओं की खबरें धनबाद से सामने आती थीं, अब वैसी दहशत राज्य के दूसरे शहरों तक भी पहुंचती दिखाई दे रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी परिस्थितियों में झारखंड में आम आदमी आखिर खुद को कितना सुरक्षित महसूस करे।
मरांडी ने पुलिस के शीर्ष पदों पर नियुक्ति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस नेतृत्व में निष्पक्षता, योग्यता और जवाबदेही के बजाय सत्ता के प्रति कथित नजदीकी को महत्व दिया जा रहा है।
DGP की नियुक्ति पर उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में झारखंड में पुलिस महानिदेशक की नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सेवानिवृत्त अधिकारियों को पुलिस के सर्वोच्च पद पर नियुक्त करने की परंपरा से पुलिस व्यवस्था की निष्पक्षता और जवाबदेही प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि पुलिस नेतृत्व का आधार यदि मेरिट के बजाय राजनीतिक पसंद और कथित वफादारी बनेगा तो इसका असर कानून-व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है।
अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देने पर सवाल
मरांडी ने राज्य में कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने और कुछ अधिकारियों को पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखे जाने को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछा कि कुछ महत्वपूर्ण पदों को खाली रखने और अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देने के पीछे प्रशासनिक वजह क्या है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के बीच अतिरिक्त प्रभार के बंटवारे का आधार सार्वजनिक करने की मांग की।
कोयला तस्करी के आरोपों की जांच की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने कुछ अधिकारियों के पूर्व कार्यकाल को लेकर लगाए गए कथित आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि बोकारो और धनबाद में अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान कोयला तस्करी को संरक्षण देने और अवैध कमाई में हिस्सेदारी जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे।
हालांकि, ये आरोप राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती। मरांडी ने सरकार से पूछा कि ऐसे आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं कराई गई और यदि शिकायतें मिली थीं तो अब तक क्या कार्रवाई हुई।
CID में अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
मरांडी ने CID में तैनात वरिष्ठ अधिकारियों की क्षमताओं का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने JPSC-JSSC और CID की महत्वपूर्ण जांचों में अधिकारियों की नियुक्ति और जिम्मेदारियों को लेकर सवाल उठाए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि विभिन्न जांचों में अधिकारियों की नियुक्ति और कार्य-विभाजन की जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जिम्मेदारियां किस आधार पर तय की जा रही हैं।
‘गोली चलने के बाद अधिकारियों को भेजना शासन नहीं’
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपराध नियंत्रण को लेकर कड़े कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी घटना के बाद अधिकारियों को घटनास्थल पर भेजना ही शासन नहीं है, बल्कि अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ उन्हें संरक्षण देने वालों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुलिस पदस्थापन में राजनीतिक पसंद, चाटुकारिता या निजी वफादारी के बजाय योग्यता, ईमानदारी और जवाबदेही को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
‘पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए है’
मरांडी ने कहा कि झारखंड पुलिस का मूल उद्देश्य जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने सरकार से पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि आम जनता किसी भी कथित भ्रष्ट, पक्षपाती या राजनीतिक पुलिस व्यवस्था की कीमत नहीं चुका सकती।
फिलहाल जमशेदपुर गोलीबारी की घटना को लेकर पुलिस की कार्रवाई और जांच जारी है। वहीं, इस घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।

