GLOBAL AWAAZ मुख्य पृष्ठ पर लौटें
Politics

सहायक आचार्य भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, संशोधित रिजल्ट रद्द; चार सप्ताह में नया रिजल्ट, 2000 तक नियुक्तियों पर संकट

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के संशोधित परिणाम को किया रद्द

N
Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
07:06 am| 19 September 2026| 5 min read|
सहायक आचार्य भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, संशोधित रिजल्ट रद्द; चार सप्ताह में नया रिजल्ट, 2000 तक नियुक्तियों पर संकट

रांची: झारखंड में सहायक आचार्य भर्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद हजारों अभ्यर्थियों और वर्तमान में नियुक्त शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के संशोधित परिणाम को रद्द कर दिया है। अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर नया यानी फ्रेश रिजल्ट जारी करे। साथ ही झारखंड के मुख्य सचिव को आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा गया है।

इस फैसले का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है, जिनका नाम संशोधित परिणाम के आधार पर चयन सूची में आया था और जिन्हें राज्य के प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में नियुक्ति दी जा चुकी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 11 हजार से अधिक सहायक आचार्यों की नियुक्तियां प्रभावित हो सकती हैं, जबकि नए परिणाम में मेरिट और श्रेणीवार स्थिति बदलने की वजह से करीब 1,500 से 2,000 शिक्षकों की नौकरी पर संकट की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम स्थिति नए परिणाम के जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

क्या है पूरा मामला?

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने विज्ञापन संख्या 13/2023 के तहत प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 आयोजित की थी। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक आचार्यों के हजारों पदों पर नियुक्ति की जानी थी।

JSSC ने अगस्त 2025 में परीक्षा का परिणाम जारी किया था। इसके बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के आलोक में परिणाम में संशोधन करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद आयोग ने सितंबर 2025 से संशोधित परिणाम जारी करना शुरू किया और अलग-अलग चरणों में चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए अनुशंसा राज्य सरकार को भेजी गई।

आरक्षण और J-TET के अंकों से जुड़ा था विवाद

पूरे मामले की अहम कड़ी आरक्षित वर्ग के उन अभ्यर्थियों से जुड़ी है, जिन्होंने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी J-TET में आरक्षण का लाभ लेते हुए निर्धारित सीमा से कम अंक प्राप्त किए थे।

विभाग के निर्देश के मुताबिक, किसी आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी को अनारक्षित श्रेणी में तभी माना जा सकता है, जब उसने पात्रता परीक्षा में आरक्षण का लाभ न लिया हो और अनारक्षित श्रेणी के लिए निर्धारित 60 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल किए हों।

इसी आधार पर JSSC ने परिणाम में संशोधन किया था। लेकिन संशोधित परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से आपत्ति जताई गई और मामला अदालत तक पहुंचा। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि JSSC का संशोधित परिणाम सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय के अनुरूप नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने JSSC की ओर से जारी संशोधित परिणाम को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देश के आधार पर जारी किया गया संशोधित परिणाम सही नहीं था।

अदालत ने आयोग को चार सप्ताह के भीतर नया परिणाम जारी करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही झारखंड के मुख्य सचिव को अदालत के आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है।

इस मामले में नॉर्मलाइजेशन को लेकर दायर अवमानना याचिका पर अलग से सुनवाई होगी। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित बताई गई है।

11 हजार से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति पर क्यों पड़ेगा असर?

संशोधित परिणाम के आधार पर अब तक 11 हजार से अधिक अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा राज्य सरकार को भेजी जा चुकी है। इनमें बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अलग-अलग जिलों के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में नियुक्त होकर काम कर रहे हैं।

अब जब संशोधित परिणाम ही रद्द हो गया है, तो नए सिरे से मेरिट और चयन सूची तैयार करनी होगी। ऐसे में वर्तमान में नियुक्त शिक्षकों की स्थिति भी नए परिणाम पर निर्भर करेगी।

अगर नए परिणाम में किसी मौजूदा शिक्षक का नाम चयन सूची में बरकरार रहता है, तो उसकी नियुक्ति पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ सकता। लेकिन यदि मेरिट, श्रेणी या पात्रता के आधार पर किसी का चयन नए परिणाम में नहीं होता है, तो उसकी नियुक्ति प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।

यही वजह है कि इस फैसले के बाद करीब 1,500 से 2,000 नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर संकट की आशंका जताई जा रही है। हालांकि यह संख्या अंतिम नहीं है और वास्तविक स्थिति JSSC के नए परिणाम के बाद ही सामने आएगी।

26,001 पदों के लिए हुई थी भर्ती

सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 का आयोजन कुल 26,001 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए किया गया था। इसमें कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 के लिए अलग-अलग श्रेणियों में नियुक्तियां होनी थीं।

झारखंड में सहायक आचार्य के पदों की भर्ती व्यवस्था 2022 में बनाए गए नए नियमों के तहत संचालित हो रही है। झारखंड हाईकोर्ट के एक जून 2026 के फैसले में भी अदालत ने उल्लेख किया था कि राज्य सरकार ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए कुल 50,000 सहायक आचार्य पद स्वीकृत किए हैं, जिनमें 20,825 इंटरमीडिएट प्रशिक्षित सहायक आचार्य और 29,175 स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य के पद शामिल हैं।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण कदम JSSC की ओर से उठाया जाना है। आयोग को चार सप्ताह की समयसीमा में नया परिणाम तैयार करना होगा।

इसके लिए संभावित रूप से:

  • संशोधित परिणाम को आधार बनाकर नई मेरिट सूची तैयार की जाएगी।

  • आरक्षण और J-TET अंकों से संबंधित नियमों को ध्यान में रखा जाएगा।

  • अभ्यर्थियों की श्रेणीवार स्थिति दोबारा निर्धारित की जा सकती है।

  • नए परिणाम के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों की सूची तैयार होगी।

  • जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति पहले हो चुकी है, उनकी स्थिति भी नए परिणाम से स्पष्ट होगी।

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि नए परिणाम में वर्तमान में कार्यरत कितने शिक्षकों का चयन बरकरार रहता है और कितने अभ्यर्थियों की स्थिति बदलती है।

हाईकोर्ट में भी चल रहे हैं मामले

सहायक आचार्य भर्ती के संशोधित परिणाम को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में भी कई मामले लंबित हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, संशोधित परिणाम को कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है और इनमें से कुछ मामलों की सुनवाई अक्टूबर में निर्धारित है।

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद इन मामलों की दिशा पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, अलग-अलग याचिकाओं में अदालत के आदेश और उनके दायरे के आधार पर स्थिति अलग हो सकती है।

अभ्यर्थियों के लिए क्या है सबसे अहम?

फिलहाल अभ्यर्थियों और नियुक्त सहायक आचार्यों के लिए सबसे महत्वपूर्ण अपडेट JSSC के नए रिजल्ट का होगा। सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर नया परिणाम जारी करने का निर्देश दिया है।

इसलिए जब तक नया परिणाम जारी नहीं हो जाता, तब तक किसी भी मौजूदा शिक्षक की नौकरी समाप्त होने की बात को अंतिम नहीं माना जा सकता। नौकरी पर अंतिम स्थिति नए परिणाम और उसके आधार पर होने वाली आगे की कार्रवाई से ही तय होगी।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने झारखंड की सहायक आचार्य भर्ती प्रक्रिया को एक बार फिर बड़े मोड़ पर ला दिया है। संशोधित रिजल्ट रद्द होने के बाद अब JSSC को नए सिरे से परिणाम जारी करना होगा। इससे 11 हजार से अधिक नियुक्तियां प्रभावित होने की संभावना है और करीब 1,500 से 2,000 शिक्षकों की नियुक्ति पर संकट की आशंका सामने आई है।

अब सभी की नजर JSSC पर है कि वह सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित चार सप्ताह की समयसीमा के भीतर नया परिणाम कब जारी करता है और नई मेरिट सूची में किन अभ्यर्थियों का चयन बरकरार रहता है।

"The convergence of information, technology, and global transparency represents the foundation of responsible journalism."

इस खबर को सोशल मीडिया पर शेयर करें

व्हाट्सएप, एक्स (ट्विटर), फेसबुक या डायरेक्ट लिंक द्वारा साझा करें