रांची: हरमू चौक पर लगाए गए “विकसित भारत संकल्प सेवा चौक” के बोर्ड को हटाए जाने के मुद्दे पर बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बोर्ड को उखाड़कर फेंका, जो निंदनीय है। उन्होंने इस घटना को देश के विकास और राष्ट्र सेवा के संकल्प से जोड़ते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
‘कांग्रेस को भारत शब्द से चिढ़’ : संदीप वर्मा
संदीप वर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की गतिविधियों से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें ‘भारत’ शब्द से ही चिढ़ और नफरत है। उन्होंने कहा कि हरमू चौक पर “विकसित भारत संकल्प सेवा चौक” के नामकरण के बाद लगाया गया बोर्ड देश को विकसित बनाने के संकल्प का प्रतीक था।
बीजेपी प्रवक्ता के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देश के विकास को लेकर लिए गए संकल्प की प्रतिबद्धता को याद रखने के उद्देश्य से यह बोर्ड लगाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी में लगाए गए बोर्ड को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हटा दिया।
‘बोर्ड हटाना विकसित भारत के संकल्प का अपमान’
संदीप वर्मा ने कहा कि बोर्ड किसी व्यक्ति या पार्टी के प्रचार के लिए नहीं, बल्कि विकसित भारत के संकल्प से जुड़ा था। उनके अनुसार, इस तरह बोर्ड को हटाया जाना देश के विकास के संकल्प का अपमान है।
उन्होंने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सत्ता से लंबे समय तक दूर रहने के कारण पार्टी लगातार अलग-अलग मुद्दों के जरिए राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
चुनाव आयोग के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा
बीजेपी प्रवक्ता ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग को मुद्दा बनाकर देश की संवैधानिक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता पर सवाल खड़े कर रही है।
वर्मा ने कहा कि कांग्रेस देश और झारखंड में अराजकता की स्थिति पैदा करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि जनता कांग्रेस की राजनीति और उसके व्यवहार को देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब चुनाव के जरिए देगी।
कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार
बीजेपी प्रवक्ता संदीप वर्मा के इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया इस बयान में सामने नहीं आई है। बोर्ड हटाने की घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावों और मौके की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट का हिस्सा नहीं है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब यह मामला झारखंड की सियासत में एक और विवाद का मुद्दा बन गया है।

