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अनंत सिंह की विधायकी पर संकट! विधानसभा सचिवालय ने भेजा नोटिस, 7 दिन में मांगा जवाब

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Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
11:09 am| 2 November 2026| 5 min read|
अनंत सिंह की विधायकी पर संकट! विधानसभा सचिवालय ने भेजा नोटिस, 7 दिन में मांगा जवाब

Bihar Politics: बिहार की मोकामा विधानसभा सीट से विधायक अनंत सिंह की राजनीतिक और कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जनता दल यूनाइटेड (JDU) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अब उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बिहार विधानसभा सचिवालय ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के निर्देश पर अनंत सिंह को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। जेडीयू ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल कानून के तहत उनकी विधायकी समाप्त करने की मांग की है।

जेडीयू से निष्कासन के बाद शुरू हुई सदस्यता समाप्त करने की मांग

दरअसल, जेडीयू ने 24 अक्टूबर 2026 को मोकामा विधायक अनंत सिंह को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की ओर से जारी आदेश में उन पर पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने, वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था।

पार्टी ने अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी थी। इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को पत्र लिखकर दलबदल कानून के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी।

विधान परिषद चुनाव में पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार का आरोप

जेडीयू की शिकायत का मुख्य आधार हाल में हुए बिहार विधान परिषद चुनाव को बताया जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के समर्थन के बजाय जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार किया था।

जेडीयू का कहना है कि अनंत सिंह ने पार्टी के निर्देशों के विपरीत जाकर दूसरे दल के उम्मीदवार का समर्थन किया। इसके अलावा पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कथित तौर पर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया गया है। इन्हीं गतिविधियों को आधार बनाकर पार्टी ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की और अब विधानसभा की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।

विधानसभा अध्यक्ष ने दिया अपना पक्ष रखने का मौका

विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी नोटिस में अनंत सिंह से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के अनुसार, विधायक लिखित रूप में अपना पक्ष रख सकते हैं या व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब दे सकते हैं।

इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष को जेडीयू की ओर से शिकायत के साथ कुछ दस्तावेज और प्रमाण भी उपलब्ध कराए गए हैं। अब अनंत सिंह के जवाब और पार्टी की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

यहां यह समझना जरूरी है कि पार्टी से निष्कासन और विधानसभा की सदस्यता समाप्त होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। जेडीयू से निकाले जाने भर से अनंत सिंह की विधायकी अपने आप समाप्त नहीं होती। उनकी सदस्यता पर फैसला दलबदल कानून के तहत विधानसभा अध्यक्ष की प्रक्रिया और निर्णय के बाद ही होगा।

दुलारचंद यादव हत्याकांड में भी सुप्रीम कोर्ट का आदेश

अनंत सिंह की राजनीतिक मुश्किलों के बीच दुलारचंद यादव हत्याकांड का मामला भी चर्चा में है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्टूबर 2026 को उनकी जमानत पर रोक लगाते हुए एक दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का भी निर्देश दिया है। दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा में चुनावी हिंसा के दौरान हुई थी।

नीलम देवी को भी झेलनी पड़ी कार्रवाई

जेडीयू ने अनंत सिंह के साथ उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया था। निष्कासन के बाद नीलम देवी से जुड़ी सरकारी सुविधाओं को लेकर भी कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। उन्हें सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

अब सात दिनों के जवाब पर टिकी निगाहें

फिलहाल अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता पर अंतिम फैसला होना बाकी है। विधानसभा सचिवालय के नोटिस के बाद अब सबकी नजरें उनके जवाब पर टिकी हैं। वह अपने ऊपर लगे आरोपों के संबंध में क्या पक्ष रखते हैं और जेडीयू की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों पर विधानसभा अध्यक्ष क्या निर्णय लेते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

यानी, फिलहाल अनंत सिंह की विधायकी समाप्त नहीं हुई है, लेकिन उनकी सदस्यता को लेकर दलबदल कानून के तहत प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

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