रांची: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद सभा स्थल के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद अब झारखंड तक पहुंच गया है। इस मामले को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग ने रांची के कोतवाली थाने में लिखित शिकायत देकर प्राथमिकी दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत किशोर ने शुक्रवार को कोतवाली थाना पहुंचकर पुलिस को शिकायत सौंपी। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी की घटना से जुड़ी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध खबरों और वीडियो में सभा स्थल पर धार्मिक अनुष्ठान किए जाने की जानकारी सामने आई है। कांग्रेस का आरोप है कि यह कार्रवाई खड़गे की जातिगत पहचान से जोड़कर की गई और इसे अनुसूचित जाति समाज के अपमान के रूप में देखा जाना चाहिए।
8 अगस्त को हुई थी खड़गे की जनसभा
मामला 8 अगस्त 2026 का है, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद रैली’ को संबोधित किया था। कार्यक्रम के बाद रामलीला मैदान में कथित तौर पर हवन-यज्ञ और गंगाजल का छिड़काव किए जाने का वीडियो सामने आया। कांग्रेस ने इसे ‘शुद्धिकरण’ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी।
विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे जातिगत भेदभाव और दलित समाज के अपमान से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की। दूसरी ओर, संबंधित संगठन की ओर से आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया कि अनुष्ठान का उद्देश्य किसी जाति या समुदाय का अपमान करना नहीं था। संगठन ने इसे अपनी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा आयोजन बताया है।
‘जातिगत पहचान के कारण ऐसा हुआ तो गंभीर मामला’
रांची में शिकायत देने के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की जातिगत पहचान के कारण उसके सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद किसी स्थान को ‘शुद्ध’ करने की कार्रवाई की जाती है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति के अपमान का मामला नहीं रह जाता। उनके अनुसार यह अनुसूचित जाति समाज के सम्मान, समानता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है।
उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि जांच में जातिगत भेदभाव या अस्पृश्यता की भावना को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां सामने आती हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करने की मांग की।
झारखंड कांग्रेस ने जताया आक्रोश
इस मामले को लेकर झारखंड कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति के आधार पर भेदभाव करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
कांग्रेस का कहना है कि देश में सामाजिक समानता और छुआछूत के खिलाफ लंबे समय से कानूनी और सामाजिक लड़ाई चली है। ऐसे में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ जैसा आयोजन किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
हल्द्वानी में पहले ही दर्ज हो चुकी है FIR
हल्द्वानी के इसी मामले में उत्तराखंड पुलिस पहले ही प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है। 8 सितंबर को एक शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 196 और 299 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धारा के तहत मामला दर्ज किया है। जांच की जिम्मेदारी एसपी क्राइम को दी गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक इस मामले में पुलिस को बड़ी संख्या में शिकायतें भी मिली थीं। सोशल मीडिया पर सामने आए फोटो और वीडियो को भी जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।
मामला अब राजनीतिक मुद्दा भी बना
हल्द्वानी का यह विवाद अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा है। कांग्रेस ने इसे दलित सम्मान और सामाजिक समानता से जोड़कर देशभर में उठाया है। पार्टी के नेताओं की ओर से संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
झारखंड में कोतवाली थाने में दी गई शिकायत के बाद अब सभी की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। कांग्रेस ने मांग की है कि शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर पूरे मामले की जांच की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो।

