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CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, CJP ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम; झारखंड समेत देशभर में आंदोलन की चेतावनी

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Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
11:32 am| 25 September 2026| 5 min read|
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, CJP ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम; झारखंड समेत देशभर में आंदोलन की चेतावनी

रांची। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। CJP ने चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो झारखंड समेत देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के रांची लोकसभा प्रभारी एवं झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता ईशान कुमार झा और संगठन के कोर सदस्य मोहिन खान ने चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका से जुड़े कई मुद्दे उठाए। 

CEC पर लगाए गंभीर आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP प्रतिनिधियों ने दावा किया कि इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट में पिछले करीब 10 महीनों के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई 14 आपत्तियों को दरकिनार किए जाने और कुछ नियमों में कथित तौर पर ढील दिए जाने का उल्लेख किया गया है।

संगठन ने इन दावों को लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया। CJP ने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा दें और मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। संगठन ने आपराधिक कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

SIR प्रक्रिया पर रोक की मांग

CJP ने देश में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति जताई। संगठन की मांग है कि SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए या फिर पहले लागू मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को बहाल किया जाए।

CJP का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, क्योंकि इसका सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के संवैधानिक अधिकार से है।

2023 के चुनाव संबंधी कानून को वापस लेने की मांग

प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन ने वर्ष 2023 में पारित चुनाव संबंधी कानून को वापस लेने की भी मांग की। CJP का दावा है कि इस कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को कुछ परिस्थितियों में सिविल और आपराधिक कार्रवाई से सुरक्षा दिए जाने का प्रावधान है।

संगठन ने इस प्रावधान को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।

48 घंटे का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

CJP ने अपनी मांगों को लेकर चुनाव आयोग और संबंधित संस्थाओं को 48 घंटे का समय देने की बात कही है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में उसकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो झारखंड सहित अन्य राज्यों में जमीनी स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।

संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलन का स्वरूप व्यापक होगा और इसे जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलनों की तर्ज पर विभिन्न स्थानों तक ले जाने की तैयारी की जाएगी।

खुद को गैर-राजनीतिक दबाव समूह बताता है CJP

CJP प्रतिनिधियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संगठन की भूमिका को भी स्पष्ट किया। उनका कहना था कि CJP खुद को किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में खड़े संगठन के रूप में नहीं देखता, बल्कि एक गैर-राजनीतिक दबाव समूह के तौर पर काम कर रहा है।

संगठन ने कहा कि शिक्षा, मतदान के अधिकार और नागरिकों के अन्य बुनियादी अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर उसका अभियान आगे भी जारी रहेगा।

पश्चिम बंगाल, दिल्ली, बिहार और केरल के मतदाता आंकड़ों का किया उल्लेख

प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP प्रतिनिधियों ने पश्चिम बंगाल, दिल्ली, बिहार और केरल के मतदाता आंकड़ों का भी उल्लेख किया। संगठन ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले कुछ राज्यों में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए और जोड़े गए हैं।

CJP का कहना है कि मतदाता सूची में इस तरह के बदलावों को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। संगठन ने मांग की कि मतदाता सूची में होने वाले बदलावों की स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से समीक्षा की जाए, ताकि किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से न हटे और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

छात्रों और युवाओं को कानूनी सहायता देने का दावा

CJP ने यह भी बताया कि संगठन झारखंड में विभिन्न आंदोलनों में शामिल छात्रों और युवाओं को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। संगठन के मुताबिक, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़े मामलों में युवाओं को कानूनी जानकारी और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बहस तेज

CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई है जब देश में मतदाता सूची, चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। संगठन ने अपने आरोपों और मांगों के जरिए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है।

हालांकि, CJP द्वारा लगाए गए आरोप संगठन के दावे हैं। इन आरोपों पर चुनाव आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर उसका पक्ष भी खबर में शामिल किया जाना आवश्यक होगा।


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