ग्लोबल आवाज न्यूज से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री ने दी सफाई, कहा- नियुक्ति पत्र लेने के बाद योगदान नहीं देने वाले डॉक्टरों से मांगी जा रही अंडरटेकिंग; एमबीबीएस सीटें 520 से बढ़ाकर 1680 करने का किया दावा
रांची। झारखंड में सरकारी डॉक्टरों के गायब होने और नियुक्ति के बाद योगदान नहीं देने के मामलों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि राज्य में डॉक्टर सरकारी रिकॉर्ड से गायब नहीं हैं, बल्कि ऐसे डॉक्टरों से जवाब मांगा जा रहा है, जिन्होंने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बावजूद अब तक अपने पद पर योगदान नहीं दिया है। सरकार ऐसे सभी डॉक्टरों से अंडरटेकिंग मांग रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर उन्होंने नियुक्ति के बाद भी योगदान क्यों नहीं दिया।
ग्लोबल आवाज न्यूज से विशेष बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि डॉक्टरों की नियुक्ति और उनके योगदान से जुड़ी प्रक्रिया पर सरकार की नजर है। जिन अभ्यर्थियों ने नियुक्ति पत्र लेने के बाद भी ज्वाइन नहीं किया है, उनसे इसका कारण स्पष्ट करने को कहा जा रहा है। सरकार यह जानना चाहती है कि किन परिस्थितियों में नियुक्ति मिलने के बावजूद डॉक्टरों ने अपनी सेवा शुरू नहीं की।
स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि झारखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाना और आम लोगों तक बेहतर चिकित्सा सेवा पहुंचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में एमबीबीएस की सीटों की संख्या पहले 520 थी, जिसे बढ़ाकर अब 1680 कर दिया गया है। इससे राज्य में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए अवसर बढ़ने के साथ भविष्य में डॉक्टरों की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है।
मेडिकल सिटी और मेडिकल टूरिज्म पर भी जोर
स्वास्थ्य मंत्री ने बातचीत के दौरान मेडिकल सिटी और मेडिकल टूरिज्म की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि झारखंड में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने और राज्य को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से मेडिकल सिटी विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इसके अलावा नए मेडिकल संस्थानों की स्थापना पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि राज्य में ही बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को दूसरे राज्यों का रुख कम करना पड़े।
डॉक्टरों की उपलब्धता और नियुक्ति प्रक्रिया पर रहेगी नजर
राज्य में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाने, नए चिकित्सा संस्थानों की स्थापना और मेडिकल सिटी जैसी योजनाओं के बीच डॉक्टरों की उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऐसे में नियुक्ति पत्र मिलने के बाद योगदान नहीं देने वाले डॉक्टरों से जवाब मांगने की प्रक्रिया को इसी व्यापक व्यवस्था के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना और चिकित्सा सेवाओं का विस्तार करना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि योगदान नहीं देने वाले डॉक्टरों की ओर से क्या जवाब दिया जाता है और सरकार आगे इस मामले में क्या कदम उठाती है।

