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Politics

मन की बात में PM मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक की 10वीं वर्षगांठ को किया याद, नशामुक्त भारत और जनगणना पर भी बोले

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नवीन कुमार
Editor & Correspondent at Global Awaaz
07:04 am| 27 September 2026| 5 min read|
मन की बात में PM मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक की 10वीं वर्षगांठ को किया याद, नशामुक्त भारत और जनगणना पर भी बोले

नई दिल्ली, 27 सितंबर 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश की सुरक्षा, युवाओं की भूमिका, जनगणना, स्वच्छता और नशामुक्त भारत समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।

सर्जिकल स्ट्राइक को बताया आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम

प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक को याद करते हुए कहा कि इस कार्रवाई ने आतंकवाद से निपटने की भारत की नीति को दुनिया के सामने एक नया उदाहरण दिया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को भी रेखांकित किया।

9/11 हमले की 25वीं वर्षगांठ का भी जिक्र

‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमले की 25वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

जनगणना में भागीदारी की अपील

पीएम मोदी ने नागरिकों से जनगणना की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की। उन्होंने इसे देश की भविष्य की नीतियों और विकास की योजना के लिए महत्वपूर्ण बताया।

स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर

महात्मा गांधी जयंती के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने स्वच्छता के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने लोगों से स्वच्छता को केवल अभियान नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदत बनाने की अपील की।

युवाओं से नशामुक्त भारत का संदेश आगे बढ़ाने की अपील

प्रधानमंत्री ने युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए नशामुक्त भारत के लिए जागरूकता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने युवाओं से सकारात्मक संदेश और रचनात्मक गतिविधियों के जरिए समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने युवाओं की उपलब्धियों, विज्ञान और एस्ट्रोनॉमी से जुड़ी गतिविधियों तथा समाज और पर्यावरण के लिए काम कर रहे लोगों के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

‘मन की बात’ के इस एपिसोड में प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश रहा कि देश की प्रगति केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि आम नागरिकों की भागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी से संभव है।

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