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Politics

SIR को लेकर झारखंड कांग्रेस का चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग

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Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
11:07 am| 28 September 2026| 5 min read|
SIR को लेकर झारखंड कांग्रेस का चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग

रांची: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर झारखंड कांग्रेस ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को रांची के धुर्वा स्थित निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर उन्हें पद से हटाने की मांग की।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की अगुआई में आयोजित इस प्रदर्शन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, नेता विधायक दल, कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव, विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग और केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।

SIR के नाम पर पात्र मतदाताओं को परेशान करने का आरोप

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर आम और पात्र मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है और इसमें किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से हटाया जाना गंभीर मामला होगा।

कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या SIR की प्रक्रिया के दौरान हर पात्र नागरिक को अपना नाम जांचने, दावा करने, आपत्ति दर्ज कराने और अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिल रहा है। पार्टी नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए, ताकि किसी भी वास्तविक मतदाता का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो।

राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की गई। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है।

पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में लोगों के बीच अपने नाम को लेकर आशंका पैदा हुई है। कांग्रेस ने मांग की कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे उचित सूचना और अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी की ओर से हाल में सामने आई एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों के दौरान आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।

बताया गया कि इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, नाम बहाल करने, Form-6, अपील और वोटर डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल थे। कांग्रेस ने इन मामलों को गंभीर बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की मांग की।

आयोग ने कहा, अलग-अलग राय संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा

वहीं, चुनाव आयोग की ओर से आंतरिक मतभेद की खबरों पर कहा गया है कि अलग-अलग राय और आपत्तियां संस्थागत checks and balances का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, SIR से जुड़े अंतिम आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

चुनाव आयोग के इस स्पष्टीकरण के बावजूद कांग्रेस ने अपने विरोध को जारी रखने का संकेत दिया है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े किसी भी फैसले में पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

SIR को लेकर झारखंड में राजनीतिक विवाद लगातार तेज होता जा रहा है। कांग्रेस के प्रदर्शन और राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस मांग पर आगे क्या कार्रवाई होती है।

कांग्रेस ने साफ किया है कि वह मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा आगे भी उठाती रहेगी।

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