रांची: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM/NRHM) और स्वास्थ्य विभाग में पिछले 10 वर्षों के वित्तीय आवंटन, खर्च और खरीद की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने धनबाद में सामने आए कथित वित्तीय अनियमितता के मामले का हवाला देते हुए पूरे राज्य में जांच कराने की मांग रखी है।
धनबाद के मामले का दिया हवाला
बाबूलाल मरांडी ने पत्र में कहा कि धनबाद में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा वर्ष 2019 में दर्ज मामले से संबंधित रिपोर्ट ने स्वास्थ्य योजनाओं की वित्तीय निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं।
उनके अनुसार, मामले में केंद्र से प्राप्त 11 करोड़ रुपये से अधिक की राशि में करीब 6.97 करोड़ रुपये के कथित गबन का उल्लेख है। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि 4.16 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आरोपी ब्लॉक अकाउंट मैनेजर और उसके परिजनों व परिचितों के खातों में ट्रांसफर की गई।
मरांडी ने कहा कि जांच केवल किसी एक संविदाकर्मी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि भुगतान की स्वीकृति, बैंक खातों के संचालन, खर्च के सत्यापन और निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
6,000 करोड़ रुपये के आवंटन की जांच की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने पिछले 10 वर्षों में NHM और स्वास्थ्य विभाग के तहत करीब 6,000 करोड़ रुपये के आवंटन और उपयोग से जुड़े आरोपों की समग्र जांच की मांग की है।
उन्होंने सभी 24 जिलों में आवंटन, आहरण, भुगतान, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद तथा वास्तविक आपूर्ति का रिकॉर्ड से मिलान कराने की मांग की है।
दवाओं, उपकरणों और सॉफ्टवेयर खरीद की भी जांच
बाबूलाल मरांडी ने जांच के दायरे में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद को भी शामिल करने की मांग की। उन्होंने अमानक दवाओं, खराब या अनुपयोगी उपकरणों, वास्तविक आपूर्ति के बिना भुगतान और बाजार दर से अधिक कीमत पर खरीद के आरोपों की जांच की बात कही।
इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की सॉफ्टवेयर और IT परियोजनाओं, कंपनियों के चयन, अनुबंध, काम की वास्तविक स्थिति और रखरखाव पर हुए भुगतान की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच की मांग की गई है।
CBI या स्वतंत्र जांच दल से जांच की मांग
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में मरांडी ने राज्य के सभी 24 जिलों में पिछले 10 वर्षों के वित्तीय आवंटन, खर्च और खरीद की जांच CBI या स्वतंत्र विशेष जांच दल से कराने की मांग की है।
उन्होंने महालेखाकार से विशेष ऑडिट कराने और स्वतंत्र विशेषज्ञों से फॉरेंसिक ऑडिट की मांग भी रखी। साथ ही बैंक स्टेटमेंट, बिल-वाउचर, टेंडर दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर, गुणवत्ता जांच रिपोर्ट और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की अपील की है।
दोषियों पर कार्रवाई और विधानसभा में रिपोर्ट की मांग
मरांडी ने कहा कि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कथित गबन की राशि की वसूली और विभागीय कार्रवाई की भी मांग की।
उन्होंने सरकार से जांच की स्पष्ट समयसीमा तय करने और जांच की प्रगति व कार्रवाई रिपोर्ट विधानसभा के समक्ष रखने का आग्रह किया है।
नोट: स्वास्थ्य विभाग में वित्तीय अनियमितताओं और गबन से जुड़े आंकड़े एवं आरोप बाबूलाल मरांडी द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में किए गए दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

