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बड़गाईं जमीन मामले में CM हेमंत सोरेन को हाईकोर्ट से झटका, PMLA कोर्ट की कार्यवाही पर रोक से इनकार

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन मामले में झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला

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Naveen Kumar
Editor & Correspondent at Global Awaaz
06:55 am| 19 September 2026| 5 min read|
बड़गाईं जमीन मामले में CM हेमंत सोरेन को हाईकोर्ट से झटका, PMLA कोर्ट की कार्यवाही पर रोक से इनकार

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने रांची की विशेष PMLA अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने और अपने खिलाफ मामले में राहत देने की मांग की थी। इस फैसले के बाद अब मामले में निचली अदालत की कार्रवाई आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला रांची के बड़गाईं इलाके की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच की गई थी। हेमंत सोरेन ने इस मामले में रांची की विशेष PMLA अदालत में अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई को चुनौती देते हुए डिस्चार्ज याचिका दाखिल की थी।

विशेष PMLA अदालत ने 8 जून 2026 को उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ मामला बनता हुआ माना था। इसके बाद हेमंत सोरेन ने इस आदेश को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट में क्या हुआ?

हाईकोर्ट में हेमंत सोरेन की ओर से दलील दी गई थी कि मामले में उनके खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए जरूरी पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई है। उनकी ओर से विशेष PMLA अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग भी की गई थी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस स्तर पर निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत के फैसले के बाद अब PMLA विशेष अदालत में मामले की आगे की प्रक्रिया जारी रह सकेगी।

आरोप तय करने की प्रक्रिया पर क्या असर?

हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब रांची की विशेष PMLA अदालत में मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रिपोर्टों के मुताबिक मामला आरोप तय किए जाने के चरण में है। अगली सुनवाई में अदालत आरोप गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती है।

हेमंत सोरेन का क्या पक्ष है?

हेमंत सोरेन ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों और निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है। उनकी ओर से यह दलील दी गई है कि मामले में कानूनी आधार पर राहत मिलनी चाहिए। हाईकोर्ट में इसी आधार पर विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी।

हालांकि, हाईकोर्ट के ताजा फैसले का अर्थ यह नहीं है कि हेमंत सोरेन को इस मामले में दोषी ठहरा दिया गया है। अदालत ने फिलहाल उनकी याचिका में मांगी गई राहत नहीं दी है और मामले की निचली अदालत में कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

पहले भी हाईकोर्ट से मिल चुकी है जमानत

बड़गाईं जमीन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन को 28 जून 2024 को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। इसके बाद वह जेल से बाहर आए और बाद में दोबारा झारखंड के मुख्यमंत्री बने।

अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब सबकी नजर रांची की विशेष PMLA अदालत की अगली कार्यवाही पर है। मामले में आरोप तय होने के बाद मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वहीं हाईकोर्ट में दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका से जुड़ी आगे की कानूनी कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को निर्धारित है।

महत्वपूर्ण: यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। किसी आरोपी के खिलाफ आरोप या जांच का होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले के बाद ही माना जाएगा।

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