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रांची में अब प्लास्टिक का विकल्प बनाएंगी महिलाएं, नागा बाबा सब्जी बाजार में शुरू हुई बायोडिग्रेडेबल पॉलीबैग यूनिट

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Global Awaaz Admin
Chief Editor & Administrator at Global Awaaz.
10:52 am| 2 October 2026| 5 min read|
रांची में अब प्लास्टिक का विकल्प बनाएंगी महिलाएं, नागा बाबा सब्जी बाजार में शुरू हुई बायोडिग्रेडेबल पॉलीबैग यूनिट

रांची: प्रतिबंधित पॉलीथिन के इस्तेमाल पर रोक और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में रांची नगर निगम ने गांधी जयंती के मौके पर एक नई पहल की है। नागा बाबा सब्जी बाजार में बायोडिग्रेडेबल पॉलीबैग निर्माण इकाई की शुरुआत की गई है। इस इकाई का उद्घाटन 2 अक्टूबर को रांची नगर निगम की महापौर रोशनी खलखो और उप महापौर नीरज कुमार ने किया।

खास बात यह है कि इस यूनिट का संचालन महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं करेंगी। यानी पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ इस पहल के जरिए महिलाओं के लिए रोजगार और आय का नया रास्ता भी तैयार किया गया है।

प्लास्टिक के खिलाफ रांची की नई पहल

रांची नगर निगम की ओर से प्रतिबंधित पॉलीथिन कैरी बैग के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बाजारों में प्लास्टिक की जगह पर्यावरण के अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नागा बाबा सब्जी बाजार में यह निर्माण इकाई स्थापित की गई है।

नगर निगम का मानना है कि स्थानीय स्तर पर बायोडिग्रेडेबल बैग का उत्पादन होने से बाजारों में पर्यावरण अनुकूल बैग की उपलब्धता बढ़ेगी और पारंपरिक प्लास्टिक बैग पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

महिलाएं संभालेंगी उत्पादन से लेकर बिक्री तक की जिम्मेदारी

इस यूनिट की सबसे खास बात इसका महिला-केंद्रित मॉडल है। इकाई का संचालन एरिया लेवल फेडरेशन (ALF) से जुड़ी महिला सदस्य करेंगी।

महिलाएं केवल मशीन चलाने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उत्पादन, संचालन और मार्केटिंग की जिम्मेदारी भी संभालेंगी। इससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।

साथ ही महिलाओं के प्रबंधन, उद्यमिता और विपणन कौशल को विकसित करने में भी यह इकाई मदद करेगी।

हर घंटे 40 किलो पॉलीबैग बनाने की क्षमता

नगर निगम के अनुसार, इस यूनिट में बायोडिग्रेडेबल पॉलीबैग बनाने के लिए PVAT और Filler का इस्तेमाल किया जाएगा। दोनों कच्चे माल को 7:3 के अनुपात में मिलाया जाएगा।

इकाई में लगी मशीन की उत्पादन क्षमता लगभग 40 किलोग्राम पॉलीबैग प्रति घंटे बताई गई है।

नगर निगम के अनुमान के मुताबिक:

  • प्रति किलोग्राम उत्पादन लागत: ₹140

  • प्रति किलोग्राम संभावित बिक्री मूल्य: ₹160

  • प्रति किलोग्राम संभावित अधिशेष: ₹20

  • प्रति घंटे उत्पादन क्षमता: 40 किलोग्राम

  • प्रति घंटे संभावित बिक्री: ₹6,400

  • प्रति घंटे संभावित अधिशेष: ₹800

हालांकि वास्तविक अधिशेष उत्पादन और बिक्री की मात्रा पर निर्भर करेगा। उत्पादन लागत में कच्चा माल, बिजली, श्रम और अन्य खर्च शामिल हैं।

झारखंड में नगर निकाय की पहली ऐसी पहल

रांची नगर निगम के मुताबिक, झारखंड में किसी नगर निकाय द्वारा इस तरह की बायोडिग्रेडेबल पॉलीबैग निर्माण इकाई स्थापित करने की यह पहली पहल है।

इस मॉडल के जरिए नगर निगम ने पर्यावरण संरक्षण और महिला आर्थिक सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ने की कोशिश की है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में इसे रांची के दूसरे बाजारों तक भी विस्तार देने की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं।

सिर्फ बैग बनाने की यूनिट नहीं, आत्मनिर्भर रांची की कोशिश

नगर निगम का उद्देश्य इस पहल को केवल एक निर्माण इकाई तक सीमित रखना नहीं है। इसके जरिए शहर में पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना भी है।

अगर बाजारों में इन बैगों की मांग बढ़ती है, तो इससे महिला समूहों के लिए आय के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर पर्यावरण अनुकूल बैग उपलब्ध होने से दुकानदारों और ग्राहकों को प्लास्टिक के विकल्प भी आसानी से मिल सकेंगे।

नागरिकों से प्लास्टिक छोड़ने की अपील

रांची नगर निगम ने शहरवासियों से प्रतिबंधित पॉलीथिन कैरी बैग का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की है। नगर निगम ने लोगों से खरीदारी के दौरान पर्यावरण अनुकूल और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले बैग को प्राथमिकता देने की अपील की।

नगर निगम का कहना है कि स्वच्छ और पर्यावरण सुरक्षित रांची बनाने में सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है।

उद्घाटन के अवसर पर नगर आयुक्त सुशांत गौरव, अपर नगर आयुक्त संजय कुमार, उप नगर आयुक्त रविंद्र कुमार, सहायक नगर आयुक्त, नगर प्रबंधक समेत नगर निगम के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

अब देखना यह होगा कि नागा बाबा सब्जी बाजार से शुरू हुई यह पहल रांची के दूसरे बाजारों में कितनी तेजी से पहुंचती है और प्लास्टिक के खिलाफ शहर की मुहिम में महिलाओं की यह नई भूमिका कितना बड़ा बदलाव लाती है।

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