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नियमित व्यायाम से दिल को नियंत्रित करने वाली नसों में हो सकते हैं बदलाव, वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन

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12:04 pm| 26 October 2026| 5 min read|
नियमित व्यायाम से दिल को नियंत्रित करने वाली नसों में हो सकते हैं बदलाव, वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन

उपशीर्षक: चूहों पर किए गए एक शोध में सामने आया कि 10 सप्ताह की मध्यम एरोबिक एक्सरसाइज से हृदय की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले तंत्रिका समूहों की संरचना में बदलाव देखे गए।

ब्रिस्टल, 26 अक्टूबर 2026। नियमित व्यायाम को हृदय की सेहत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अब एक नए वैज्ञानिक अध्ययन से संकेत मिला है कि शारीरिक गतिविधि का प्रभाव केवल हृदय की मांसपेशियों तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि यह उन तंत्रिकाओं की संरचना को भी प्रभावित कर सकती है, जो दिल की धड़कन और उसकी गतिविधियों को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती हैं।

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि नियमित एरोबिक व्यायाम के बाद हृदय को नियंत्रित करने वाले तंत्रिका समूहों में संरचनात्मक बदलाव दिखाई दिए। शोध की एक खास बात यह रही कि शरीर के दाएं और बाएं हिस्से में मौजूद इन तंत्रिका समूहों में अलग-अलग परिवर्तन दर्ज किए गए।

यह शोध Autonomic Neuroscience जर्नल में प्रकाशित हुआ। हालांकि, यह अध्ययन चूहों पर किया गया है। इसलिए इसके निष्कर्षों को सीधे मनुष्यों पर लागू करने से पहले आगे के शोध की आवश्यकता है।

व्यायाम और हृदय की तंत्रिका प्रणाली के बीच संबंध

हृदय की गतिविधियों को नियंत्रित करने में स्वायत्त तंत्रिका तंत्र की अहम भूमिका होती है। यह शरीर की ऐसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, जो सामान्यतः बिना किसी सचेत प्रयास के चलती रहती हैं।

इस प्रणाली का एक हिस्सा जरूरत के अनुसार हृदय की धड़कन और उसकी गतिविधियों को प्रभावित करता है। गर्दन के निचले हिस्से और ऊपरी छाती के पास स्थित स्टेलेट गैन्ग्लिया नामक तंत्रिका समूह भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शोधकर्ताओं ने इसी तंत्रिका नेटवर्क पर व्यायाम के प्रभावों का अध्ययन किया। उनके निष्कर्ष बताते हैं कि नियमित शारीरिक गतिविधि इन तंत्रिका समूहों की संरचना में ऐसे बदलाव ला सकती है, जिन पर आगे और विस्तृत अध्ययन किया जा सकता है।

10 सप्ताह के प्रशिक्षण में दिखे अलग-अलग बदलाव

अध्ययन के दौरान चूहों को 10 सप्ताह तक मध्यम स्तर का एरोबिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने उन्नत त्रि-आयामी विश्लेषण तकनीकों की मदद से तंत्रिका कोशिकाओं की संख्या, आकार और वितरण का आकलन किया।

विश्लेषण में शरीर के दोनों ओर स्थित तंत्रिका समूहों के बीच अंतर पाया गया। प्रशिक्षित चूहों में दाईं ओर के तंत्रिका समूह में न्यूरॉन्स की अनुमानित संख्या बाईं ओर की तुलना में लगभग चार गुना थी।

कोशिकाओं के आकार में भी अलग-अलग बदलाव दिखाई दिए। बाईं ओर की तंत्रिका कोशिकाएं लगभग दोगुनी बड़ी हो गईं, जबकि दाईं ओर की कोशिकाओं का आकार कुछ कम हुआ।

ये परिणाम संकेत देते हैं कि व्यायाम का प्रभाव हृदय को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका प्रणाली के सभी हिस्सों पर एक जैसा नहीं हो सकता। हालांकि, इन संरचनात्मक बदलावों का वास्तविक हृदय कार्यों पर क्या असर पड़ता है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

हृदय रोगों के इलाज में क्या हो सकता है फायदा?

इस अध्ययन के निष्कर्ष भविष्य में कुछ हृदय संबंधी समस्याओं के उपचार को बेहतर समझने में मदद कर सकते हैं। इनमें अनियमित हृदय गति यानी एरिदमिया, एंजाइना और तनाव से जुड़ा टैकोत्सुबो सिंड्रोम शामिल हैं, जिसे आम तौर पर 'ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम' भी कहा जाता है।

कुछ मामलों में डॉक्टर हृदय पर अत्यधिक तंत्रिका संकेतों के प्रभाव को कम करने के लिए विशेष प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं। इनमें स्टेलेट गैन्ग्लियन नर्व ब्लॉक और कुछ तंत्रिका मार्गों को निष्क्रिय करने वाली प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं।

यदि भविष्य के अध्ययनों में मनुष्यों में भी इसी तरह के दाएं-बाएं अंतर की पुष्टि होती है, तो यह जानकारी कुछ उपचारों को अधिक सटीक बनाने में उपयोगी हो सकती है। फिलहाल, इस संभावना को शुरुआती वैज्ञानिक निष्कर्ष के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

आगे किन सवालों के जवाब तलाशेंगे वैज्ञानिक?

शोधकर्ताओं के सामने अब यह समझने की चुनौती है कि तंत्रिका कोशिकाओं की संरचना में आए बदलाव हृदय की वास्तविक गतिविधियों को किस तरह प्रभावित करते हैं। इसके लिए अन्य पशु मॉडलों और आगे चलकर मनुष्यों में भी अध्ययन किए जाने की आवश्यकता होगी।

वैज्ञानिक ऐसे गैर-आक्रामक संकेतकों की पहचान करने की दिशा में भी काम करना चाहते हैं, जिनकी मदद से बिना सर्जरी के तंत्रिका गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सके।

फिलहाल इस अध्ययन से मिलने वाला प्रमुख संदेश यह है कि व्यायाम और हृदय की सेहत के बीच संबंध पहले से समझे गए पहलुओं से अधिक जटिल हो सकता है। हालांकि, मनुष्यों में इन निष्कर्षों की पुष्टि होने तक व्यायाम के आधार पर किसी विशिष्ट हृदय रोग के इलाज या रोकथाम का दावा करना उचित नहीं होगा।

स्रोत: यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के शोध पर आधारित रिपोर्ट; शोध पत्र Autonomic Neuroscience में प्रकाशित।

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