धनबाद: झारखंड में आधुनिक कृषि को बढ़ावा देने और किसानों को उन्नत खेती के प्रति प्रोत्साहित करने की दिशा में धनबाद के पूर्वी टुंडी प्रखंड स्थित भोजपुर गांव में खेती का एक बेहतर उदाहरण देखने को मिला। यहां झारखंड के कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने प्रगतिशील किसान शिशिर गोराई के खेतों का निरीक्षण किया। करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर विभिन्न फसलों की आधुनिक तकनीक से की जा रही खेती को देखकर उन्होंने किसान के प्रयासों की सराहना की।
साढ़े तीन एकड़ में कई फसलों की खेती
निरीक्षण के दौरान कृषि निदेशक ने खेतों में उगाई जा रही विभिन्न फसलों की जानकारी ली। किसान शिशिर गोराई अपने खेतों में बैंगन, करेला, खीरा, हल्दी, अदरक समेत कई प्रकार की फसलों की खेती कर रहे हैं। एक ही कृषि क्षेत्र में अलग-अलग फसलों का उत्पादन खेती को विविधता देने और किसानों के लिए बेहतर संभावनाएं विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
शिशिर गोराई के खेतों में खेती के तरीकों और फसल उत्पादन के प्रयासों को देखकर कृषि निदेशक ने उनके कार्यों की प्रशंसा की। इस तरह की पहल अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
किसानों ने रखीं सिंचाई और सुरक्षा से जुड़ी मांगें
खेतों के निरीक्षण के दौरान स्थानीय किसानों ने कृषि कार्यों में आने वाली समस्याओं और अपनी जरूरतों से कृषि निदेशक को अवगत कराया। किसानों ने खेतों की सुरक्षा के लिए घेराबंदी कराने, सिंचाई की बेहतर व्यवस्था के लिए डीप बोरिंग की सुविधा उपलब्ध कराने और समय पर उन्नत किस्म के बीज मुहैया कराने की मांग रखी।
किसानों का कहना है कि खेती में बेहतर उत्पादन के लिए समय पर बीज की उपलब्धता के साथ-साथ सिंचाई और फसलों की सुरक्षा की समुचित व्यवस्था जरूरी है। इन सुविधाओं के अभाव में किसानों को खेती के दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
समय पर बीज वितरण का मिला आश्वासन
किसानों की समस्याओं और मांगों को सुनने के बाद कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने आश्वासन दिया कि इस बार उन्नत बीजों का वितरण समय पर कराने की व्यवस्था की जाएगी। समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज मिलने से किसानों को बुआई की तैयारी करने और निर्धारित कृषि मौसम के अनुसार खेती शुरू करने में मदद मिल सकती है।
कृषि निदेशक के इस आश्वासन से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, खेतों की घेराबंदी और डीप बोरिंग जैसी अन्य मांगों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, यह संबंधित विभाग के निर्णय और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करेगा।
आधुनिक खेती से किसानों को प्रोत्साहन
भोजपुर गांव में किसान शिशिर गोराई द्वारा साढ़े तीन एकड़ में की जा रही विविध फसलों की खेती क्षेत्र में कृषि विकास की संभावनाओं को दर्शाती है। कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा खेतों का निरीक्षण करना और किसानों से सीधे उनकी समस्याओं पर चर्चा करना स्थानीय कृषि व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
यदि किसानों को समय पर उन्नत बीज, पर्याप्त सिंचाई सुविधा और फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध होते हैं, तो वे अपनी खेती को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं। भोजपुर गांव का यह उदाहरण आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने और किसानों की बुनियादी जरूरतों पर ध्यान देने के महत्व को सामने लाता है।

