पटना: बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर बना हुआ है। राज्य के कई हिस्सों में नदियों के बढ़े जलस्तर और लगातार बारिश के कारण बड़ी आबादी प्रभावित हुई है। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 14 जिलों की 514 ग्राम पंचायतों और 84 प्रखंडों में करीब 40.21 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। पटना से लेकर भागलपुर और भोजपुर से लेकर खगड़िया तक कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
14 जिलों में बाढ़ का असर
बाढ़ से प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल शामिल हैं। इन जिलों के निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में बाढ़ का प्रभाव सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है।
कई जगहों पर लोगों को अपने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों, बांधों और सुरक्षित इलाकों में शरण लेनी पड़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के सामने भोजन, पीने के पानी और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है।
गंगा समेत कई नदियां उफान पर
बिहार में गंगा के अलावा कई प्रमुख नदियों के जलस्तर ने भी चिंता बढ़ाई है। गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बह चुकी हैं।
भागलपुर में गंगा का जलस्तर विशेष चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं पटना और आसपास के क्षेत्रों में भी नदी के बढ़े जलस्तर के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई सड़कें और संपर्क मार्ग प्रभावित
बाढ़ के पानी के कारण कई इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। कुछ जगहों पर सड़क और तटबंधों को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। इससे ग्रामीण इलाकों में आवागमन और जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों तक पहुंचने के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और आवश्यक सेवाएं पहुंचाने की कोशिश जारी है।
राहत और बचाव अभियान तेज
बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार काम कर रही हैं। पहले से ही राज्य के संवेदनशील इलाकों में NDRF और SDRF की 33 टीमें तैनात की गई थीं। इसके अलावा सैकड़ों सरकारी नावों को भी राहत और बचाव कार्य में लगाया गया है।
प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर और सामुदायिक रसोई भी संचालित की जा रही हैं, जहां लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन को प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामान और राहत पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
कुछ इलाकों में पानी घटने से राहत की उम्मीद
बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच कुछ इलाकों से राहत की खबर भी सामने आई है। ताजा आकलन के मुताबिक कई स्थानों पर बाढ़ का पानी धीरे-धीरे घट रहा है। पटना से मुंगेर के बीच गंगा के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि भागलपुर के कहलगांव में जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है, इसलिए पूरी तरह राहत की स्थिति अभी नहीं बनी है।
राज्य में कई नदियों का जलस्तर अभी भी खतरे या चेतावनी स्तर के आसपास बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
बारिश का अलर्ट भी बढ़ा रहा चिंता
बाढ़ के बीच मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। बारिश जारी रहने की स्थिति में नदियों के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। इससे पहले सितंबर में बिहार में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन के सामने बाढ़ प्रभावित आबादी तक राहत पहुंचाने के साथ-साथ तटबंधों और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
बाढ़ ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण और दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर पड़ा है। घरों में पानी घुसने के साथ खेती और पशुपालन पर भी इसका असर पड़ा है। कई परिवारों के सामने अपने घर और सामान की सुरक्षा के साथ पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है।
फिलहाल प्रशासन का फोकस लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, भोजन-पानी उपलब्ध कराने और प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर है।
बिहार में बाढ़ का दायरा बड़ा हो चुका है और 40 लाख से अधिक लोगों का प्रभावित होना इसकी गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में पानी घटने से राहत के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन कई इलाकों में स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है। आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर पर नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण होगा।

