धनबाद। धनबाद सिविल सर्जन कार्यालय में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट से जुड़े आवेदनों के निपटारे में कथित अनियमितता और राशि मांगने के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। मामले में धनबाद निवासी श्यामल मुखर्जी की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने मामले की जांच कर रिपोर्ट धनबाद उपायुक्त को सौंपी है।
धनबाद डीसी के निर्देश के बाद सिविल सर्जन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी शिकायत में लगाए गए आरोपों के साथ-साथ क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट से संबंधित लंबित आवेदनों और दस्तावेजों की भी जांच करेगी।
50 हजार से 3 लाख रुपये तक मांगने का आरोप
स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई शिकायत में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट के नए आवेदन और नवीकरण से जुड़े मामलों के निपटारे में कथित तौर पर राशि मांगने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित डीडीएम की ओर से आवेदकों से कथित तौर पर 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की मांग की गई। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कई आवेदन लंबे समय से लंबित हैं और उनकी स्वीकृति के लिए कथित तौर पर राशि की मांग की जाती है।
हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
तीन साल से अधिक समय से आवेदन लंबित होने का दावा
शिकायत में दावा किया गया है कि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट से संबंधित कई आवेदन तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि आवेदन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और कथित राशि की मांग के कारण आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जांच कमेटी अब लंबित आवेदनों के रिकॉर्ड और उनके निपटारे की प्रक्रिया की भी पड़ताल करेगी।
आवेदकों को धमकी देने का भी आरोप
शिकायत में कुछ आवेदकों को कथित तौर पर धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस संबंध में शिकायत किए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
इसके अलावा संबंधित कर्मी के लंबे समय से धनबाद में पदस्थापन और कंप्यूटर एप्लीकेशन से जुड़े प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में इन बिंदुओं की भी जांच कराने की मांग की गई है।
लंबित आवेदनों और दस्तावेजों की होगी जांच
सिविल सर्जन द्वारा गठित तीन सदस्यीय कमेटी शिकायत में उल्लेखित सभी बिंदुओं की जांच करेगी। टीम क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट से जुड़े लंबित आवेदनों, उनके निपटारे की स्थिति और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा करेगी।
इसके अलावा आवेदन प्रक्रिया में अपनाई गई प्रक्रिया, रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। कमेटी अपनी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जांच रिपोर्ट से साफ होगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल यह मामला शिकायत और आरोपों के आधार पर जांच के स्तर पर है। राशि मांगने, आवेदन लंबित रखने, धमकी देने या अन्य अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट से जुड़े आवेदनों के निपटारे में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं।
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की जांच पर अब सभी की नजर है। रिपोर्ट के आधार पर यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

