रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले पर राज्य सरकार और अभ्यर्थियों के पक्ष के बीच कानूनी लड़ाई जारी है। JPSC 11वीं-13वीं, JSSC CGL 2023, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। सरकार ने इन परीक्षाओं को रद्द करने के अपने निर्णय का बचाव करते हुए जांच में सामने आए कथित गंभीर अनियमितताओं और वित्तीय लेन-देन के साक्ष्यों का हवाला दिया।
राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा अदालत में पक्ष रख रही हैं। सरकार का कहना है कि संबंधित परीक्षाओं में गड़बड़ियां सामान्य प्रकृति की नहीं थीं, बल्कि बड़े स्तर पर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले तथ्य जांच के दौरान सामने आए हैं।
सरकार ने कोर्ट में रखा 'मनी ट्रेल' का तर्क
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि मामले की जांच सीआईडी कर रही है और जांच काफी आगे बढ़ चुकी है। सरकार के अनुसार, अनुसंधान के दौरान कथित मनी ट्रेल यानी पैसों के लेन-देन से जुड़े ठोस प्रमाण भी सामने आए हैं।
राज्य का तर्क है कि जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्ति प्रक्रिया को आगे जारी रखना उचित नहीं था। सरकार ने इसी आधार पर परीक्षा रद्द करने के फैसले को सही ठहराने की कोशिश की।
हालांकि, इन दावों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना अभी बाकी है और हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने उठाए थे कई सवाल
इस मामले में बुधवार को भी करीब साढ़े तीन घंटे तक सुनवाई हुई थी। जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने उस दौरान परीक्षा रद्द करने के फैसले को लेकर राज्य सरकार से कई सवाल पूछे थे।
अदालत की प्रमुख चिंता यह थी कि जब सीआईडी की जांच अभी पूरी नहीं हुई है, तो पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को समाप्त करने का आधार क्या था। सुनवाई के दौरान जांच की लंबी अवधि को लेकर भी सवाल उठे।
कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि यदि जांच में इतना समय लग रहा है, तो सरकारी विभागों में लंबे समय तक पद रिक्त रहने का असर प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
2500 सफल अभ्यर्थियों के भविष्य पर भी अदालत की नजर
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने परीक्षा में मेरिट के आधार पर सफल हुए करीब 2500 अभ्यर्थियों के हितों को भी महत्वपूर्ण माना।
अदालत की ओर से यह सवाल उठाया गया कि यदि पूरी परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप हैं, तो क्या उसकी वजह से उन सभी अभ्यर्थियों को नुकसान पहुंचाया जाना उचित होगा, जिन्होंने अपनी योग्यता के आधार पर सफलता हासिल की है।
कोर्ट ने इस पहलू पर भी जोर दिया कि किसी व्यापक अनियमितता के आधार पर प्रत्येक सफल उम्मीदवार को दोषी मानना उचित नहीं हो सकता। यानी अदालत के सामने एक तरफ परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता का सवाल है, तो दूसरी तरफ उन अभ्यर्थियों के भविष्य का मुद्दा भी है जिनकी नियुक्ति मेरिट के आधार पर हुई है।
अब सरकार की दलीलों पर अदालत के रुख का इंतजार
गुरुवार की सुनवाई में सरकार की ओर से जांच और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों को आधार बनाकर परीक्षा रद्द करने के फैसले का बचाव किया जा रहा है। वहीं, अदालत पहले ही इस बात पर सवाल उठा चुकी है कि पूरी प्रक्रिया को रद्द करने के लिए उपलब्ध सामग्री पर्याप्त थी या नहीं।
ऐसे में इस मामले में हाईकोर्ट का आगे का रुख हजारों अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत को यह तय करना है कि जांच में सामने आए तथ्यों और सफल अभ्यर्थियों के हितों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाए।
फिलहाल JPSC, JSSC CGL, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से जुड़े इस मामले की सुनवाई जारी है। अंतिम फैसला अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।

