GLOBAL AWAAZ मुख्य पृष्ठ पर लौटें
Top News

JPSC विवाद में सफल अभ्यर्थियों को झटका, हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज; सिंगल बेंच में फैसला सुरक्षित

11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा विवाद में सफल अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से झटका लगा है। खंडपीठ ने हस्तक्षेप याचिका खारिज कर दी। अब सभी की नजर एकल पीठ के सुरक्षित फैसले पर टिकी है, जिससे परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

A
AmarJeet
Editor & Correspondent at Global Awaaz
12:08 pm| 26 October 2026| 5 min read|
JPSC विवाद में सफल अभ्यर्थियों को झटका, हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज; सिंगल बेंच में फैसला सुरक्षित

रांची: 11वीं से 13वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद में सफल अभ्यर्थियों को झारखंड हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। परीक्षा के मुख्य परिणाम को रद्द करने से जुड़े मामले में दायर हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब इसी मामले से जुड़े मूल विवाद पर एकल पीठ सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख चुकी है, तो इस स्तर पर हस्तक्षेप का आदेश देना उचित नहीं होगा।

मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान प्रार्थी और प्रतिवादी पक्ष की ओर से अपनी-अपनी दलीलें रखी गईं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने प्रार्थियों को अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए हस्तक्षेप याचिका खारिज कर दी।

क्या है पूरा मामला?

11वीं से 13वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को लेकर विवाद उस समय गहरा गया, जब राज्य सरकार की ओर से परीक्षा रद्द करने संबंधी अधिसूचना जारी की गई। इस फैसले को सफल अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अभ्यर्थियों का पक्ष है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी, सफल हुए और चयन प्रक्रिया में आगे बढ़े हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ सकता है।

वहीं, परीक्षा रद्द करने के सरकारी फैसले और उसके कानूनी प्रभाव को लेकर हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है। इसी व्यापक विवाद के बीच अयूब तिर्की एवं अन्य की ओर से अपील याचिका दाखिल की गई थी। अपीलकर्ताओं ने मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी।

सफल अभ्यर्थियों ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सफल अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने अदालत को बताया कि परीक्षा रद्द करने संबंधी सरकारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एकल पीठ में सुनवाई पूरी हो चुकी है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एकल पीठ ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

सफल अभ्यर्थियों की ओर से यह तर्क दिया गया कि जब मूल विवाद पर एकल पीठ का फैसला आना बाकी है, तब इसी मुद्दे पर खंडपीठ द्वारा अलग से हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस दलील पर विचार करते हुए फिलहाल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

अभी खत्म नहीं हुआ JPSC विवाद

हाईकोर्ट की ओर से हस्तक्षेप याचिका खारिज किए जाने का मतलब यह नहीं है कि 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा को लेकर चल रहे मूल विवाद का अंतिम निपटारा हो गया है। अदालत के आदेश के बाद भी परीक्षा रद्द करने संबंधी सरकारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एकल पीठ का फैसला महत्वपूर्ण बना हुआ है।

यानी फिलहाल पूरे मामले की दिशा एकल पीठ के सुरक्षित फैसले पर निर्भर करेगी। एकल पीठ के आदेश के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा और उसके परिणाम को लेकर आगे क्या कानूनी स्थिति बनेगी।

अभ्यर्थियों की निगाहें अब एकल पीठ के फैसले पर

हाईकोर्ट के ताजा रुख के बाद 11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के बीच चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि, वर्तमान आदेश को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। मूल याचिकाओं पर एकल पीठ का फैसला अभी बाकी है।

ऐसे में परीक्षा के मुख्य परिणाम, नियुक्ति प्रक्रिया और सरकार के परीक्षा रद्द करने संबंधी फैसले को लेकर तस्वीर फिलहाल पूरी तरह साफ नहीं हुई है। सफल अभ्यर्थियों समेत इस मामले से जुड़े सभी पक्षों की नजर अब हाईकोर्ट की एकल पीठ के आगामी फैसले पर टिकी है।

"The convergence of information, technology, and global transparency represents the foundation of responsible journalism."

इस खबर को सोशल मीडिया पर शेयर करें

व्हाट्सएप, एक्स (ट्विटर), फेसबुक या डायरेक्ट लिंक द्वारा साझा करें