बोकारो: बोकारो स्टील प्लांट (BSL) में कर्मचारियों का असंतोष एक बार फिर सड़क पर दिखाई दिया। मंगलवार को बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने मौन जुलूस निकालकर प्रबंधन और एनजेसीएस नेताओं के खिलाफ विरोध जताया। हाथों में काले झंडे लेकर बड़ी संख्या में कर्मचारी मजदूर मैदान से प्रशासनिक भवन तक पहुंचे।
प्रदर्शन में महिला कर्मचारियों की भागीदारी खास तौर पर देखने को मिली। संघ के मुताबिक, बीएसएल स्तर पर कर्मचारियों से जुड़ी 45 से अधिक मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इसके अलावा हाल में हुए बोनस निर्धारण को लेकर भी कर्मचारियों में नाराजगी है।
मजदूर मैदान से प्रशासनिक भवन तक निकला जुलूस
मंगलवार को कर्मचारी मजदूर मैदान में जुटे। इसके बाद सभी मौन जुलूस की शक्ल में प्रशासनिक भवन स्थित धरना स्थल की ओर रवाना हुए। कर्मचारियों के हाथों में काले झंडे थे और उन्होंने नारेबाजी के बजाय मौन रहकर अपना विरोध दर्ज कराया।
धरना स्थल पर सभा भी हुई, जिसमें बीएसएल प्रबंधन, इस्पात मंत्रालय और एनजेसीएस से जुड़े मुद्दों पर वक्ताओं ने अपनी बात रखी।
बोनस के मुद्दे पर एनजेसीएस नेताओं को घेरा
सभा को संबोधित करते हुए संघ के महासचिव हरिओम ने बोनस निर्धारण को लेकर एनजेसीएस नेताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर उनकी ओर से अपेक्षित तरीके से आवाज नहीं उठाई जा रही है।
हरिओम के अनुसार, दिल्ली में हुई प्रक्रिया के दौरान 32 हजार रुपये बोनस तय किया गया और विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधियों ने इसका विरोध नहीं किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि बोनस निर्धारण को लेकर कर्मचारियों के बीच पहले से ही असंतोष था।
हालांकि, बोनस निर्धारण और एनजेसीएस नेताओं की भूमिका को लेकर लगाए गए ये आरोप संघ की ओर से रखे गए हैं। संबंधित पक्षों का जवाब सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
45 से ज्यादा मांगें लंबित होने का दावा
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों की 45 से अधिक मांगें बीएसएल स्तर पर लंबे समय से लंबित हैं। उनका आरोप है कि इन मुद्दों पर प्रबंधन की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
वेज रिवीजन एमओयू और एरियर से जुड़े मामलों के बाद अब बोनस को लेकर भी कर्मचारियों में असंतोष बढ़ने की बात संघ की ओर से कही गई।
मान्यता प्राप्त यूनियन के चुनाव का भी मुद्दा उठा
संघ के अध्यक्ष दिलीप कुमार ने मान्यता प्राप्त यूनियन के चुनाव नहीं कराए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नहीं होने की स्थिति में कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले उनकी पर्याप्त भागीदारी के बिना लिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर संघ अपना आंदोलन जारी रखेगा।
महिला कर्मचारियों ने संभाली जुलूस की कमान
इस विरोध प्रदर्शन में महिला कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही। संघ ने इसे कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता बताया। महिला कर्मियों ने जुलूस में आगे रहकर आंदोलन की अगुवाई की।
कार्यक्रम में संघ के कार्यकारिणी सदस्य शत्रुंजय कुमार, त्रिवेणी सिंह, माणिक मुंडा, देवेंद्र, चुन्नी कुमारी और रेणु कुमारी समेत कई कर्मचारी शामिल रहे।
आंदोलन आगे बढ़ाने का संकेत
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने साफ किया कि लंबित मांगों और बोनस सहित अन्य मुद्दों का समाधान नहीं होने पर उनका आंदोलन जारी रह सकता है। फिलहाल कर्मचारियों के इस विरोध के बाद बीएसएल प्रबंधन और संबंधित यूनियन नेताओं की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर बनी हुई है।

